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भागीरथी शिला और गौरीकुंड सीवेज ट्रीटमेंट बनाने का किया विरोध

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उत्तरकाशी। गंगोत्री में भागीरथी गंगा की पवित्रता बनाए रखने के लिए भागीरथी शिला से सीवर लाइन ले जाने और पवित्र गौरीकुंड के पास सीवेज ट्रीटमेंट बनाए जाने से साधु संत व तीर्थपुरोहितों में रोष है।
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राष्ट्रीय नदी संरक्षण राष्ट्रीय गंगा सफाई मिशन के बजट से गंगोत्री में योजना पर काम किया जा रहा है। गंगोत्री मंदिर समिति के पूर्व अध्यक्ष रमेश सेमवाल व पूर्व उपाध्यक्ष शांति प्रसाद सेमवाल कहते हैं कि पहले भागीरथी शिला इतनी चौड़ी और ऊंची थी कि उनके बुजुर्ग शिला पर सीढ़ी लगाकर उसकी पूजा-अर्चना करते थे। कई वर्षों से आ रही आपदा से भागीरथी शिला का बड़ा हिस्सा दब गया और अब सीवर लाइन को इसी पवित्र शिला से ले जाया जा रहा है। दिगबंर पूर्णमगिरी भी कहते है कि जिस स्थान पर मां गौरी स्नान करने के लिए भागीरथी में आती थी व देवतागण देेवी की स्तुति करते थे। उस गौरीकुंड के पास सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट कभी गंगोत्री की तबाही का कारण बन सकती है। उन्होंने डीएम को पत्र भेजकर इस पर एतराज जताया है। उनके आश्रम क्षेत्र के आसपास सीवर लाइन से नही जोड़ा गया। ऐसी कई जगह है, जहां होटल, आश्रमों की गंदगी सीधे भागीरथी में जा रही है। योजना बनाते समय स्थानीय साधु संतों, तीर्थपुरोहितों से सुझाव नहीं लिए गए। गंगा प्रदूषण नियंत्रण इकाई के परियोजना प्रबंधक सुरेश पाल ने स्वीकार किया कि कुछ जगह सीवर लाइन नही बिछाई जा सकी। सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का पानी गौरीकुंड में भागीरथी में ही छोड़ा जाएगा। कचरा निकालकर कहीं अन्यत्र जमीन में दबाया जाएगा। अभी सीवर लाइन का काम अधूरा है।
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