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उत्तराखंड के अफसरों ने कोश्यारी को मान लिया नया CM!

Mon, 18 Apr 2016 09:19 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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भगत सिंह कोश्यारी - फोटो : amar ujala
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उत्तराखंड में सरकार जब बनेगी तब बनेगी, लेकिन राज्य की नौकरशाही भाजपा नेता भगत सिंह कोश्यारी को संभावित मुख्यमंत्री के तौर पर ही ट्रीट कर रही है और उसी तरह से रिस्पांस भी दे रही है। दो तीन मामलों में भगतदा का हस्तक्षेप भी यह बताता है कि वह इस समय फुलफॉर्म में है।
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सरकार गिराने से लेकर अब तक जितना भी राजनीतिक घटनाक्रम हुआ, उसमें भाजपा के भीतर भगत सिंह कोश्यारी ने लीड ली है। शुरू से लेकर अब तक भगतदा सधे हुए कदमों से तेज चाल के साथ आगे बढ़ रहे हैं। चर्चा है कि पिछले दिनों एक रिटायर्ड नौकरशाह को पद से मुक्त करने के मामले में भगतदा ने जबरदस्त नाराजगी जताई।

इसके बाद अतिथि शिक्षकों के मामले में आदेश के लहजे में अपनी बात कही तो देर रात तक अफसरों की टीम भगतदा के आवास पर जमी रही। हालांकि भगतदा के मुताबिक अतिथि शिक्षकों के मामले में अभी आदेश जारी नहीं हुआ, लेकिन विभाग में हलचल मची है।
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वहीं, भाजपा में भी इस समय सरकार गठन के लिए सभी की जुबां पर भगत सिंह कोश्यारी के नेतृत्व की ही चर्चा है। पार्टी के भीतर क्या फाइनल हुआ और क्या नहीं, यह तो किसी को खबर नहीं, लेकिन राजनीतिक गलियारों में भगतदा के सीएम बनने की चर्चा खूब हो रही है। यही वजह है कि राज्य की सरकारी मशीनरी कोश्यारी को सीएम जैसा ही ट्रीटमेंट दे रही है।
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देहरादून जिले को कर्मभूमि बनाना चाहते हैं कई दिग्गज

विजय बहुगुणा - फोटो : file photo
उत्तराखंड में राजनीतिक उठापटक के बीच दिग्गजों की अपने लिए मनपसंद सीटों की तलाश जारी है। सरकार का गठन हो या ना हो, इससे इतर भाजपा-कांग्रेस के दिग्गजों की नजर चुनाव पर टिकी है। दोनों ही पार्टी के कई बड़े नेता देहरादून को अपनी कर्मभूमि बनाने की तैयारी में है।

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल बलूनी देहरादून से चुनाव लड़ने का मन बना रहे हैं। उन्हें पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के करीबी होने का फायदा मिल सकता है। उनकी नजर देहरादून की ऋषिकेश, रायपुर और धर्मपुर विधानसभा सीट पर है। हालांकि वह पहले कोटद्वार से चुनाव लड़ चुके हैं। वैसे तो उन्हें राज्यसभा में मौका मिलने की संभावना है, लेकिन फिर भी उनकी नजर देहरादून की उक्त तीनों सीटों पर लगी है।

यूपी के समय से ही विधायक और मंत्री जैसे ओहदे संभालते आ रहे हरक सिंह रावत इस समय हरीश सरकार गिराने में मुख्य भूमिका निभाने से भाजपा के बड़े नेताओं के चहेते बने हुए हैं। पिछले चुनाव में वह रुद्रप्रयाग से विधायक निर्वाचित हुए थे, लेकिन इस बार देहरादून की सहसपुर और डोईवाला को अपनी कर्मभूमि बनाना चाहते हैं। हरक पहले भी रुद्रप्रयाग से चुनाव न लड़ने की बात कह चुके हैं।

वहीं, विजय बहुगुणा या उनके पुत्र सौरभ वैसे तो ऊधमसिंह नगर जिले की सितारगंज सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं, सौरभ पिछले दो साल से सितारगंज में ही समय बिता रहे हैं, लेकिन जानकार लोगों की मानें तो विजय बहुगुणा भी देहरादून में किसी सुरक्षित सीट की तलाश में है। टिहरी से सांसद निर्वाचित होने के कारण दून की आधी सीटों पर वह प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

टिहरी से पिछला चुनाव हारे किशोर उपाध्याय की नजर भी इस बार देहरादून की ऋषिकेश सीट पर है। जानकार बताते हैं कि उनकी पसंद का आधार ऋषिकेश विधानसभा क्षेत्र में टिहरी विस्थापितों की बड़ी संख्या भी है।
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