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उत्तराखंडः बिखरे पड़े हैं शव, कई पेड़ों पर भी लटके दिखे

Sat, 29 Jun 2013 01:08 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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नुकसान बेहिसाब। पहाड़ के जिस इलाके में नजर दौड़ाएं, नुकसान के सिवा कुछ नजर नहीं आता।
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केदारघाटी के दूसरे इलाकों का मंजर भी दिल दहला देने वाला है। जंगलचट्टी से लेकर रामबाड़ा तक सैकड़ों शव बिखरे पड़े हैं।

कई जगह शव पेड़ों पर भी लटके दिख रहे हैं। शवों की हालत बेहद खराब हो चुकी है और इनकी पहचान भी अब लगभग नामुमकिन दिख रही है।

केदारघाटी से लेकर उत्तरकाशी तक हजारों मकान, दुकान, होटल, लॉज, स्कूल, अस्पताल भवन, दफ्तर भीषण आपदा की भेंट चढ़ गए।

सैकड़ों सड़कें क्षतिग्रस्त
कई पेयजल परियोजनाएं ध्वस्त हो गईं। बिजली परियोजनाएं बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। पहाड़ की लाइफलाइन सैकड़ों सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गईं।

सरकारी तैयारियों व संसाधनों को देखते हुए डेढ़-दो साल से पहले इसके पुनर्निर्माण की उम्मीद नहीं दिखती। अनुमान है कि करीब दो हजार किलोमीटर तक की सड़क को नुकसान पहुंचा है।

नुकसान की भरपाई संभव नहीं
उधर, आपदा प्रभावित क्षेत्रों में फंसे लगभग तीन हजार लोग शुक्रवार को निकाले गए हैं। अब भी ढाई हजार लोगों के विभिन्न स्थानों पर फंसे होने की आशंका है।

चार धाम यात्रा के मार्गों पर जो नुकसान हुआ है, आने वाले कई वर्षों में उसकी भरपाई संभव नहीं है। हजारों लोग बेरोजगार हो गए हैं। इनके घरों में रोजी-रोटी का संकट है।
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चाय की दुकान से लेकर बड़ी परियोजनाओं तक पर चोट पड़ी है। आपदा ने उत्तराखंड को तोड़कर रख दिया है और देवभूमि कई साल पीछे चली गई है। मृतक और लापता होने वाले स्थानीय लोगों की संख्या भी सैकड़ों में है।

3000 से 5000 करोड़ तक का नुकसान
आपदा में कुल 3000 से 5000 करोड़ तक के नुकसान की बात सरकारी-गैर सरकारी स्तर पर कही जा रही है।

उधर, समीक्षा बैठक में गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने कहा कि आपदा से नुकसान की भरपाई को पैसा देने में केंद्र सरकार पीछे नहीं हटेगी। पुनर्वास और पुनर्निर्माण के लिए जितनी भी राशि की जरूरत होगी, केंद्र सरकार देगी।

सबसे बड़ा सवाल पुनर्निर्माण का है। आपदा के बाद बचाव और राहत कार्य में सरकारी स्तर पर जैसी व्यवस्था दिखी, उससे आशंकाओं के पहाड़ और बड़े हो रहे हैं।

सबसे मुश्किल काम आधारभूत ढांचे को फिर से खड़ा करने का है। लेकिन तबाही के बाद 13वें दिन भी आधे से ज्यादा विभागों के पास नुकसान का ब्योरा तक नहीं है। सरकारी तंत्र फिलहाल पड़ताल में उलझा है।

उत्तराखंड आपदा के नाम पर 'शाही भोज'

जानकारों का मानना है कि पूरी चुस्ती के साथ काम किया जाए तो भी पुनर्निर्माण में डेढ़ से दो साल तक का समय तो लग ही जाएगा।

वहीं, खराब मौसम के कारण शुक्रवार को केदारधाम में किसी शव का अंतिम संस्कार नहीं हुआ। हेलीकॉप्टर हादसे में शहीद हुए 20 जांबाजों को सैन्य सम्मान के साथ शिंदे, सेना प्रमुख जनरल बिक्रम सिंह और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने श्रद्धांजलि दी। इसके बाद शव उनके पैतृक निवास के लिए रवाना कर दिए गए।

मलबा हटाने की बारी
बचाव अभियान लगभग पूरा होने के बाद अब केदारनाथ समेत अन्य इलाकों में मलबा हटाने का काम शुरू करने की तैयारी है। बड़े पत्थरों और मलबे को हटाने के लिए वायुसेना के एमआई-26 हेलीकॉप्टर से केदारनाथ में जेसीबी जैसी मशीनें पहुंचाए जाने की योजना है। मलबे में बड़ी संख्या में शवों के दबे होने की आशंका भी है क्योंकि करीब तीन हजार लोग अभी लापता हैं।

कई गांवों का विस्थापन बड़ा सवाल
प्रदेश में पहले ही 233 गांवों के विस्थापन का मसला लटका पड़ा है। इस बार की आपदा के बाद इस सूची में कई गांव और जुड़ गए हैं। इस समय 200 से ज्यादा गांव ऐसे हैं, जिनके संपर्क मार्ग और पुल बह गए हैं। अभी इन्हें शेष इलाकों से जोड़ने का ही काम शुरू होना बाकी है।

कुछ और चुनौतियां
बदरी-केदार मंदिर समिति की रामबाड़ा और गौरीकुंड में 22 और अन्य स्थानों पर दर्जन भर धर्मशालाएं नष्ट हो गई। पुजारी, कर्मचारियों की आवासीय कॉलोनी का नामोनिशान नहीं बचा। करीब 200 करोड़ रुपये की जरूरत है। पीडब्ल्यूडी, पीएमजीएसवाई की 802 सड़कें टूटी है।
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चारधाम यात्रा पर्वतीय जिलों की अर्थव्यवस्था की रीढ़ कही जा सकती है। इस यात्रा को जल्द से जल्द शुरू करने का प्रयास किया जाना चाहिए। बदरीनाथ की यात्रा तो कुछ समय बाद शुरू की ही जा सकती है। यात्रियों में विश्वास जगाना जरूरी है। यह तभी हो पाएगा जब बिजली, पानी, सड़क और कनेक्टिविटी जल्द ही दुरुस्त हो। तत्काल राहत के साथ ही दीर्घकालिक सड़क निर्माण का कार्य जल्द ही शुरू हो जाना चाहिए।-इंदु कुमार पांडे, वित्त सलाहकार, उत्तराखंड

--किसानों की खेती बाड़ी के लिए बनाई गई गूल और लघु सिंचाई की 1753 परियोजनाएं नष्ट हो गई है। तत्काल 53.56 करोड़ की दरकार है।

--स्कूलों और इंटर कॉलेज के 90 भवन क्षतिग्रस्त हो गए हैं। इनके लिए 7.9 करोड़ रुपये चाहिए।

--जल विद्युत निगम को डेढ़ सौ करोड़ और ऊर्जा निगम को लगभग पचास करोड़ के नुकसान का अनुमान है।

--जल निगम व पेयजल के दो दर्जन से ज्यादा परियोजनाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। इनके लिए प्रारंभिक तौर पर 100 करोड़ रुपये की जरूरत बताई गई है।

--स्वास्थ्य विभाग की ओर से भी स्वास्थ्य केंद्रों की मरम्मत के लिए दस करोड़ का प्रारंभिक प्रस्ताव दिया गया है।

--3000 लोग अब भी लापता।

--195 करोड़ रुपये के पैकेज का ऐलान किया केंद्र ने चारों धामों को तीर्थ यात्रा के लिए फिर से तैयार करने के लिए।
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