आकाशीय मार्ग से कई दिनों से आपदा का जायजा ले रहे मंत्रियों को हेलीकॉप्टर से देहरादून लौटना था, इसलिए ढासड़ा गांव के बुद्धि सिंह की गर्भवती बेटी नगीना को जिला अस्पताल नहीं पहुंचाया जा सका।
तड़पती नगीना ने गांव की छानी में एक बेटी को जन्म देते ही दम तोड़ दिया। मां के दूध का घूंट भी नसीब न हो पाने पर बेटी की सांसें भी कुछ ही देर में थम गईं। इस हृदयविदारक घटना ने ढासड़ा गांव ही नहीं पूरी असी गंगा घाटी को हिलाकर कर रख दिया है।
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रवांई के निषणी गांव में ब्याही ढासड़ा गांव के बुद्धि सिंह की बेटी प्रसव के लिए मई में मायके आई थी। बीते साल की आपदा के बाद से अभी तक क्षेत्र के रास्ते बहाल नहीं हुए थे कि नई आपदा धमक गई।
16 व 17 जून को अतिवृष्टि में गांव के रास्ते तबाह हो गए। यह क्षेत्र पूरी तरह अलग-थलग पड़ गया। पटवारी आए और गांव पर खतरा बताकर ग्रामीणों को छानियों (पहाड़ पर बनी झोपड़ी) में धकेल आए। चार दिन से नगीना छानियों में प्रसव पीड़ा से तड़प रही थी।
क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य कमल सिंह रावत एवं परिजनों ने जिला मुख्यालय व मातली पहुंचकर प्रशासन से हेलीकाप्टर द्वारा प्रसूता को जिला अस्पताल तक पहुंचाने की गुहार लगाई। लेकिन मंत्रियों को देहरादून लौटना था, इसलिए उन्हें इंकार कर दिया गया। अनहोनी होनी में बदल गई और 26 जून की दोपहर नगीना ने छानी में बेटी को जन्म देते ही दम तोड़ दिया।
हम लोगों को सरकारी तंत्र ने मरा समझ लिया है
ढासड़ा समेत असी गंगा घाटी के सातों गांव बीते साल अगस्त के बाद से ही अलग-थलग पड़े हैं। हम मांग कर थक गए लेकिन सरकारी तंत्र क्षेत्र की लाइफ लाइन सड़क, पुल व संपर्क मार्ग तैयार नहीं करा पाया। हैलीकॉप्टर मंत्रियों के सैर सपाटे के लिए दौड़ रहे हैं। हम लोगों को तो सरकारी तंत्र ने मरा हुआ समझ रखा है।
कमल सिंह रावत, जिला पंचायत सदस्य।