उत्तराखंड में रुक-रुककर हो रही बारिश और भारी बरसात की चेतावनी ने लोगों की नींद उड़ा रखी है। आपदाग्रस्त इलाकों में कहीं लोग रतजगा कर रहे हैं तो कहीं घर छोड़कर टेंट में रह रहे हैं।
तटवर्ती और भूस्खलन प्रभावित गांव खाली हो रहे हैं। मौसम विभाग ने चमोली और कुमाऊं के पिथौरागढ़, बागेश्वर में रविवार को भी भारी बारिश का अनुमान जताया है।
उत्तरकाशी में शुक्रवार शाम से रुक-रुककर बारिश हो रही है। इससे भागीरथी का जलस्तर बढ़ गया है। मणिकर्णिका और जड़भरत घाट के बीच कटाव तेज हो गया है।
खतरे की जद में आए घरों के लोग सामान लेकर सुरक्षित ठिकानों की ओर जाने लगे हैं।
इस हिस्से में वायरक्रेट डालने का काम पत्थरों की कमी से लगभग ठप है। गंगोरी, लक्षेश्वर, तिलोथ, जोशियाड़ा, ज्ञानसू और नगर क्षेत्र के बाशिंदे असी गंगा व भागीरथी नदी से तबाही को लेकर आशंकित हैं।
असी गंगा घाटी में खतरे की जद में आने वाले गांवों के खाली होने का सिलसिला जारी है। लोग छानियों में पलायन को मजबूर हो गए हैं।
चमोली जिले के कई इलाकों में बृहस्पतिवार दोपहर से रुक-रुककर बारिश हो रही है। सबसे अधिक दिक्कत वे ग्रामीण झेल रहे हैं, जो फिर भारी बारिश की आशंका को देखते हुए घर छोड़कर टेंट में रात गुजार रहे हैं।
देवाल प्रखंड के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्रों के ग्रामीण रतजगा कर रहे हैं।
पांडुकेश्वर गांव के 75 ग्रामीण जोशीमठ के जीएमवीएन गेस्ट हाउस के आंगन में टेंट लगाकर रह रहे हैं। यही हाल आपदा प्रभावित भ्यूंडार व पुलना गांव के ग्रामीणों का है। रुद्रप्रयाग में भी मौसम खराब है।
गंगा का जलस्तर फिर बढ़ा
दो दिनों से हो रही बारिश ने टिहरी बांध की झील के जलस्तर में वृद्धि कर दी है। झील का जलस्तर 782.55 मीटर तक पहुंच गया है। पहाड़ में बारिश से हरिद्वार में गंगा का जलस्तर फिर बढ़ गया है।
इसके बाद तटीय क्षेत्रों में मुनादी करा दी गई है। बाढ़ चौकियों को भी सतर्क कर दिया है। पहले गंगा का जल स्तर 291 मीटर पर था। वहीं बारिश के बाद जलस्तर डेढ़ मीटर बढ़ गया।