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16 साल बाद यूपी और उत्तराखंड में परिवहन समझौता

Tue, 05 Apr 2016 11:12 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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बस - फोटो : file photo
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उत्तराखंड के राज्य बनने के बाद पहली बार यूपी से परिवहन समझौता हुआ है। यूपी परिवहन निगम के अड़ंगा लगाने से हर बार करार की कवायद बेकार चली जाती थी। 16 साल के बाद उत्तराखंड और यूपी के परिवहन निगम ने समझौता कर लिया है। 
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इससे बसों के फेरे, किमी तय हो गए हैं। समय सारिणी बनने से दोनों प्रदेशों के ड्राइवरों के बीच सिर-फुटव्वल नहीं होगी। परमिट न होने के कारण प्रदेश की बसों को यूपी में रोका नहीं जाएगा।

करार के लिए अमर उजाला ने चलाई थी मुहिम
उत्तराखंड के यूपी, हरियाणा, दिल्ली आदि प्रांतों के साथ परिवहन समझौते के लिए अमर उजाला ने मुहिम चलाई थी। इसमें सबसे बड़ा पेच यूपी के साथ परिवहन समझौते में आ जाता था, लेकिन उत्तराखंड और यूपी के परिवहन निगम के प्रबंध निदेशकों की मंगलवार को लखनऊ में हुई बैठक सफल रही और दोनों प्रदेशों में समझौता हो गया है।
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उत्तराखंड परिवहन निगम के एमडी बृजेश संत और यूपी परिवहन निगम के एमडी के. रवींद्र नायक ने अनुबंध पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। उत्तराखंड परिवहन निगम के महाप्रबंधक दीपक जैन ने बताया कि दोनों प्रदेशों के निगमों के बीच 15 फीसदी बस फेरे बढ़ाने की सहमति बनी है।

समय सारिणी बनेगी, ड्राइवरों में विवाद न होगा
इसके बाद अब रोजाना यूपी की 2472 बसें और उत्तराखंड की 1725 बसें एक दूसरे के राज्य में फेरे लगाएंगी। अभी तक यूपी की 2150 बसें और उत्तराखंड की 1500 बसें रोजाना फेरे लगाती थीं।
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यूपी की बसें उत्तराखंड में 1 लाख 12 हजार किमी चलेंगी और उत्तराखंड की बसें यूपी में 2 लाख 40 हजार किमी का सफर तय करेंगी। 
बसों की समय सारिणी निर्धारित हो जाएगी। परमिट का मामला भी तय हो जाएगा। बस संचालन के लिए दोनों प्रबंध निदेशकों की तरफ से जारी की जाएगी। 
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