रुद्रपुर। यूं तो कक्षा प्रत्येक शिक्षार्थी के जीवन में बदलाव लाने का एक बड़ा माध्यम होती है। यहां से आईएएस- आईपीएस, डॉक्टर और इजीनियर बनने का सपना लोग देखते हैं पर अंडमान निकोबार के गौरव मंडल काे कक्षा ने ही ट्रैक साइकिलिस्ट बना डाला। अपने दोस्तों से साइकिलिंग के बारे में सुनते-सुनते गौरव ने साइकिलिस्ट बनने का लक्ष्य साध लिया और उसे हासिल भी कर लिया। इसका प्रमाण है गोवा नेशनल गेम्स के टीम स्प्रिंट में सिल्वर मेडल लाना।
38वें नेशनल गेम्स में शिरकत कर रहे गौरव मंडल ने बताया कि उनके दोस्त इशो एल्वम और डेविड बेकम से अक्सर पढ़ाई के दौरान कक्षा में साइकिलिंग की बातें सुनता था। इशो एल्वम पहला इंटरनेशनल प्लेयर है, जो वर्ल्ड चैंपियन जूनियर है।
वह और साई का दोस्त प्रीतम अक्सर कक्षा में साइकिलिंग के बारे में बताते थे। उन्होंने बताया था कि साइकिलिंग के बहाने पूरे देश और विदेश का भ्रमण भी हो जाता है। यही से मन में ठान लिया कि वह भी एक दिन ट्रैक साइकिलिस्ट बनेगा। इसके बाद 2021-22 में ट्रेनिंग शुरू कर दी।
ट्रेनिंग के तीन-चार महीने बाद उसका चयन साई में हो गया। यहां से उसके साइकिलिंग के जीवन की शुरुआत हो गई। फिर वह गोवा नेशनल गेम्स में शामिल हुआ। इसमें टीम स्प्रिंट में उसे सिल्वर मेडल मिला। गौरव मंडल को देवभूमि उत्तराखंड से बड़ी आस है। गोवा नेशनल गेम्स में टीम स्प्रिंट में सिल्वर की कसक को यहां गोल्ड से पूरा करना चाहते हैं।