बाजपुर। कोतवाली के अंतर्गत बरहैनी पुलिस चौकी की लापरवाही सामने आई है। पुलिस ने छात्र नेता मंदीप खैरा के गिरफ्तारी वारंट के मामले में दर्ज एफआईआर में ही खेल कर दिया। मौके पर मंदीप खैरा नहीं होने पर भी उसे नामजद आरोपी बना दिया गया। सीओ कमला बिष्ट ने कहा कि एसआई की ओर से दी गई तहरीर में मंदीप खैरा का नाम नहीं था। इस मामले में पुलिस चौकी बरहैनी में तैनात सिपाही (मुंशी) से स्पष्टीकरण मांगा गया है।
आरोप है कि छात्र नेता मंदीप खैरा पर विभिन्न मामलों में जुलाई में गुंडा एक्ट की कार्रवाई की गई थी। उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया गया था। इसी के तहत 20 अगस्त को बरहैनी पुलिस चौकी इंचार्ज संदीप पिलखवाल पुलिस टीम के साथ गांव पहाड़पुर निवासी छात्र नेता मंदीप खैरा को गुंडा एक्ट में गिरफ्तार करने के लिए वारंट लेकर पहुंचे।
इस दौरान परिजनों ने आरोपी मंदीप खैरा के घर में नहीं होने की जानकारी दी। पुलिस टीम के घर में घुसने पर परिजनों ने विरोध किया, जिस पर पुलिस और परिजनों के बीच झड़प हो गई। चौकी इंचार्ज संदीप पिलखवाल ने मंदीप खैरा के परिजनों पर सरकारी कार्य में बाधा, अभद्रता करने का आरोप लगाते हुए मंदीप खैरा, उसके पिता सुखदेव सिंह और उसकी माता रंजीत कौर पर केस दर्ज करा दिया।
वहीं, मंदीप खैरा के परिजनों का आरोप है कि दरोगा सहित पुलिस कर्मियों ने उनके साथ अभद्रता, खुद वर्दी की शर्ट का बटन खोलकर धमकाया। वायरल हुए वीडियो में भी दरोगा बटन खोलकर महिलाओं को धमकाता नजर आ रहा है।
गलती से एफआईआर में दर्ज हो गया मंदीप खैरा का नाम
बाजपुर। सीओ कमला बिष्ट ने बताया कि बरहैनी पुलिस चौकी इंचार्ज संदीप पिलखवाल की ओर से दी गई तहरीर में मंदीप खैरा का नाम नहीं था। लेकिन चौकी के सिपाही (मुंशी) की ओर से हुई गलती के कारण एफआईआर में मंदीप खैरा का नाम अंकित हो गया। जांच के बाद मंदीप का नाम हटाकर गलती को सुधारा जाएगा। इस मामले में संबंधित सिपाही (मुंशी) का स्पष्टीकरण लिया गया है।
इधर, शनिवार को सीओ बिष्ट मामले की जांच करने के लिए गांव पहाड़पुर मंदीप खैरा के घर पहुंचीं लेकिन मंदीप खैरा और उसका पड़ोसी परिवार नहीं मिला। सीओ के अनुसार पड़ोसी परिवार ने वीडियो बनाया था। सीओ परिवार के बयान लेने के लिए गई थी ताकि रिपोर्ट जल्द तैयार की जा सके।