महिलाओं के चेहरों पर मुस्कान खिलाने के प्रयास की कड़ी में अमर उजाला के बैनर तले अपराजिता कार्यक्रम के तहत महिलाओं और युवतियों की डांस प्रतियोगिता हुई। इसमें प्रतिभागियों ने अपनी नृत्य कला का जलवा बिखेरा। मुख्य अतिथि नवनिर्वाचित मेयर ऊषा चौधरी ने प्रतिभागियों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया। इस दौरान महिला सशक्तीकरण को लेकर महिलाओं ने अपने मन की बात खुलकर साझा की।
प्रगतिशील समाज में महिलाओं को आत्मनिर्भर होना चाहिए। महिलाओं ने मानसिक और शारीरिक रुप से सशक्त होना चाहिए, ताकि विषम परिस्थितियों का आसानी से मुकाबला कर सके। उनकी प्राथमिकता अपने परिवार की महिलाओं को हर तरह से सशक्त करने में सहयोग करना है। - मीना जोशी, गृहणी
मेरी एक ही बेटी है, मेरी हार्दिक इच्छा है कि मुझे एक और बेटी हो। बेटी आसमान की ऊंचाईयों को छुए, इसके लिए मैं हर संभव कोशिश करती रहती हूं। मां के बाद में बॉक्सर मेरीकॉम को पसंद करती हूं, जिन्होंने छह गोल्ड जीतकर भारत का नाम दुनियां में रोशन किया है। - पूनम जोशी, गृहणी।
मैं अपनी बेटी सीरत को शारीरिक, मानसिक व आर्थिक रुप से आत्मनिर्भर बनाना चाहती हूं। झिझक खुलवाने के लिए मैंने अपनी बेटी को डांस क्लासेज ज्वाइन करवाई है। इसी बहाने मैंने भी डांस क्लास शुरू कर दी। मैं चाहती हूं कि हर पल मेरी बेटी के चेहरे पर मुस्कान बनी रहे। - श्वेता ढिल्लन, गृहणी।
महिलाओं में वीरांगना का गुण होना जरूरी है। ताकि किसी भी अपराधी से महिलाओं को शारीरिक व मानसिक क्षति न उठानी पड़े। समाज में प्रताड़ित की जाने वाली महिलाओं की रक्षा के लिए भी हमें यथासंभव प्रयास करने चाहिए। वह अपने पड़ोस की महिलाओं के अधिकारों के प्रति सजग रहती है। -कोमल यादव, गृहणी।
पर्वतीय क्षेत्रों में पिछड़े समाज के परिवार अभी भी महिलाओं के विकास में बाधक है। नाक का सवाल बनाकर कम आयु में ही युवतियों की शादी करने की प्रवृत्ति घातक है। ऐसे में किशोरियों व महिलाओं को शैक्षिक रुप से सुदृढ़ करने की दिशा में प्रयास किए जाने चाहिए। -किरन मौलेखी, गृहणी।
तीन वर्ष पूर्व पिता के निधन के बातद मां और मैं लोगों के घरों में चूल्हा चौका कर गुजर बसर कर रहे हैं। मैं हाईस्कूल तक पढ़ी हूं, चाहकर भी आगे नहीं पढ़ पा रही हूं। डांस में मुझे अच्छा स्कोप नजर आता है। इसे मैं रोजगार के रुप में अपनाना चाहती हूं, ताकि आत्मनिर्भर बनकर मां का सहारा बन सकूं। - ममता पाल
मैं तीन साल से डांस की क्लास अटेंड कर रही हूं। इस दौरान मुझे लोगों के ताने सुनने पड़े लेकिन मैंने इसका डटकर मुकाबला किया और खुद को कमजोर महसूस नहीं होने दिया। मेरा मानना है कि जब आप सफलता के शिखर पर होते हैं, तो समाज में लोग आपके प्रति अपना नजरियां बदल लेते हैं। - रिया रुहेला, छात्रा