रुद्रपुर। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं की आय बढ़ाने के लिए एनआरएलएम के तहत खेती-किसानी से जोड़ा जा रहा है। अब जनपद में समूह की महिलाएं मेंथा की खेती करेंगी। इसके लिए सीडीओ ने सभी बीडीओ से अपने-अपने क्षेत्र से प्रस्ताव मांगे हैं।
मेंथा की खेती महंगी मानी जाती है। इस फसल को पानी की बेहद जरूरत पड़ती है। गर्मी महीने में इसकी फसल की कटाई की जा सकती है। फसल को धूप में सुखाने के बाद प्रोसेसिंग कर इससे तेल निकाला जाता है। करीब एक बीघा जमीन पर मेंथा की खेती करने पर 50 से 60 लीटर तक तेल का उत्पादन हासिल किया जा सकता है। इसका उपयोग कई तरह के सौंदर्य, दवा सहित अन्य कार्यों में उपयोग में लाया जाता है। खुले बाजार में इसका तेल प्रति लीटर 1000 से 1100 रुपये तक का बिकता है। यह फसल लगभग 120 दिन में तैयार हो जाती है। सबसे बड़ा फायदा यह है कि इस फसल को बेसहारा जानवर भी नुकसान नहीं करते। संवाद
तीन ब्लाकों में बोया जाएगा ड्रैगन फ्रूट
रुद्रपुर। मेंथा की खेती की तरह ही महिलाओं को ड्रैगन फ्रूट की खेती पर बल दिया गया है। इसके लिए बाजपुर, गदरपुर व रुद्रपुर विकास खंड में एक-एक हेक्टेयर जमीन चिह्नित की जा रही है। जहां पर समूह की महिलाएं ड्रैगन फ्रूट की खेती नजर आएंगी। संवाद
कोट
समूह ही महिलाओं को अधिक से अधिक स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध हो इसके लिए प्रयास किए जा रहे हैं। मेंथा की खेती के लिए सभी बीडीओ से प्रस्ताव मांगे गए हैं।
- संगीता आर्य, एपीडी एनआरएलएम।