लॉकडाउन में बड़े मंदिर तो बंद थे, लेकिन पूजा की सामग्री, देवी देवताओं के कपड़े, श्रृंगार का सामान, मिट्टी की मूर्तियां बनाने वाले स्वयं सहायता समूह खाली नहीं बैठे। समूहों ने सामान बनाकर स्टोर कर लिया और मास्क बनाकर परिवार का खर्चा चलाया। समूह के सदस्यों ने बताया कि आजीविका मिशन की क्षेत्र प्रमुख शांता गुरूरानी सदस्यों को आजीविका कमाने के गुर सिखाती और मार्गदर्शन करती हैं।
इनका कहना
हमारा समूह देवी देवताओं के कपड़े सिलने और ब्यूटी पार्लर का काम करता है। लॉकडाउन के दौरान समूह के सदस्यों ने आर्डर पर मास्क बनाए और समूह ने हजारों मास्क निशुल्क वितरित भी किए।-गीता चंद्रा, अध्यक्ष, चंद्रा स्वयं सहायता समूह
हमारा समूह मिट्टी से देवी देवताओं की सुंदर मूर्तियां और सजावटी वस्तुएं बनाता है, लेकिन लॉकडाउन के चलते बिक्री में गिरावट आई। लेकिन समूह ने काम बंद नहीं किया मूर्तियां बनाकर स्टोर कर रहे हैं। आने वाले त्योहार में बिक जाएंगे। -प्रसून लता, अध्यक्ष, गायत्री स्वयं सहायता समूह।
उनका समूह पेरिस प्लास्टर से सजावटी वस्तुएं मोमबत्ती स्टैंड, फ्लोर स्टैंड, अगरबत्ती, धूप बत्ती स्टैंड और डेकोरेशन फैंसी सामान बनाती है। पहले बाहरी शहरों से आर्डर मिलते थे, लेकिन लॉकडाउन के चलते काम बंद है। ऑर्डर नहीं मिल रहे हैं, जिससे परेशानी हो रही है। -मीरा श्रीवास्तव, अध्यक्ष, साई हस्तकला स्वयं सहायता समूह।
उनका समूह पशुपालन करता है, लॉकडाउन में पशुओं को चारा लाने के काम में परेशानी हुई थी। -रचना देवी, कोषाध्यक्ष, वैष्णवी स्वयं सहायता समूह। गीता चंद्रा।
मीरा श्रीवास्तव।- फोटो : KASHIPUR
प्रसून लता।- फोटो : KASHIPUR
गीता चंद्रा।- फोटो : KASHIPUR