रुद्रपुर। कभी गलती से जिंदगी की राह भटक गए मासूम अब अपने हाथों से खुद का भविष्य गढ़ रहे हैं। रुद्रपुर के बाल संप्रेक्षण गृह में इन बच्चों के चेहरे पर पछतावे की जगह उम्मीद की चमक दिखाई देती है। उनके हाथों की कलाकारी आज मोमबत्तियों में उजाला भर रही है।
रुद्रपुर का बाल संप्रेक्षण गृह कुमाऊं का पहला केंद्र है। यहां रहने वाले आठ बच्चे कभी गलत संगत या हालातों की वजह से कानून की गिरफ्त में आए थे। ये अब जिंदगी का नया सबक सीख रहे हैं। यहां बच्चों को सिर्फ किताबें नहीं दी जातीं। उनको हुनर भी सिखाया जाता है ताकि रिहा होने पर वे अपने पैरों पर खड़े हो सकें।
मोमबत्तियों को बनाते वक्त बच्चों की आंखों में एक ही सपना झलकता है कि हम भी कुछ अच्छा कर सकते हैं। दिवाली से पहले इन हाथों ने जब रंग-बिरंगी मोमबत्तियों को आकार दिया तो पूरा परिसर भरोसे से जगमगा उठा। बाल संप्रेक्षण गृह के अधिकारी बच्चों के भविष्य को लेकर काफी आशान्वित हैं। उनका कहना है कि बच्चों को यदि सही दिशा मिले तो ये समाज के लिए एक सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
खास बात यह कि यहां के आठों बच्चे अब परिवार जैसे माहौल में रहते हैं। पेशी के दौरान पुलिस सादे कपड़ों में आती है ताकि उन्हें बंदी होने का अहसास न हो। जब वे घर लौटेंगे तो अपने साथ सिर्फ एक फाइल नहीं बल्कि हुनर भी साथ लेकर जाएंगे।