सीईटीपी प्लांट के पाइप से ट्रीट होकर निकल रहा पानी।
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सितारगंज सिडकुल में लगे कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) की ओर से एक भूमि पर छोड़े गए पानी का सैंपल जांच में फेल हो गया है। इसके अलावा पानी के चार सैंपल भी आंशिक रूप से फेल हो गए हैं।
सितारंगज में सिद्ध गर्ब्यांग गांव में पीने के पानी में फैक्ट्रियों का जहर घुलने, हैंडपंपों और नलों से भी विषैला पानी आने को लेकर सिद्ध गर्ब्यांग कल्याण सेवा समिति ने एनजीटी के जस्टिस को चिट्ठी लिखी थी। इसके बाद 22 मार्च को पीसीबी की टीम ने चार सदस्यीय टीम बनाकर ट्रीटमेंट प्लांट से छोड़े गए पानी के नमूने और गांव के हैंडपंपों से निकलने वाले प्रदूषित पानी के सैंपल लिए।
टीम ने पानी के 29 और मिट्टी के दो सैंपल भरे थे। पीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी डॉ. अंकुर कंसल ने बताया कि सीईटीपी से जिस भूमि पर पानी छोड़ा गया था, उस स्थान पर पानी का सैंपल फेल हो गया है। जबकि, जहां पानी इकट्ठा हो रहा था, वहीं दूसरे खेत से लिए गए मिट्टी के सैंपल में विषाक्त तत्व मिले। इसके अलावा गांव से चार हैंडपंपों के प्रदूषित पानी के सैंपल लिए गए थे।
इन हैंडपंपों के पानी के सैंपल में कठोरता और कैल्शियम मानक से अधिक पाए गए है। अन्य स्थानों पर पानी के सैंपल ठीक पाए गए हैं। डॉ. कंसल ने बताया कि पीसीबी के मानकों के तहत पानी में कठोरता और कैल्शियम 250 मिली ग्राम प्रति लीटर होनी चाहिए, लेकिन जिन हैंडपंपों से पानी के नमूने लिए गए। वहां कठोरता और कैल्शियम की मात्रा 300 से 500 मिली ग्राम प्रति लीटर पाई गई है, जो ठीक नहीं है।