काशीपुर। एनजीटी के आदेश की धज्जियां उड़ाते हुए ढेला नदी किनारे धड़ल्ले से कूड़ा फेंका जा रहा है। नदी किनारे कूड़े के ढेर लगातार बढ़े हो रहे हैं लेकिन जिम्मेदार अधिकारी लापरवाह बने हैं। दिलचस्प बात है कि नगर निगम नदी किनारे कूड़ा डालने से इनकार कर रहा है। हालांकि अधिकारी कूड़े के ढेर जल्द हटाने और कूड़ा डालने वालों पर कार्रवाई की बात कह रहे हैं।
एनजीटी ने गंगा और सहायक नदियों पर कूड़ा डालने पर पाबंदी लगाई है। कॉर्बेट नेशनल पार्क के जंगलों से निकलने वाली ढेला नदी यूपी में रामगंगा में मिलती है। रामगंगा को गंगा की सहायक नदी माना जाता है। कुछ लोग बैलजुड़ी गांव में ढेला नदी के किनारे काफी समय से कूड़ा फेंक रहे हैं। शहर से ट्रैक्टर ट्रालियों में भरकर कूड़ा नदी किनारे फेंका जाता है।
जिसके चलते नदी किनारे कूड़े के ढेर काफी बड़े हो गए हैं। जब नदी में पानी का बहाव तेज रहता है तो कूड़ा पानी के साथ बहकर चला जाता है। नदी किनारे जिन जगहों पर कूड़े के ढेर लगे हैं, वहां कुछ लोग अपनी जमीन बताते हैं। उनका कहना है कि बाढ़ में उनकी जमीन कट जाती है। वे अपनी जमीन में कूड़ा फिंकवाने की बात कहते हैं।
नदी में पानी का बहाव तेज होने के कारण कूड़ा नदी में ही गिर जाता है। इतनी बड़ी मात्रा में कूड़ा शहर का ही हो सकता है लेकिन निगम अधिकारी उससे इनकार करते हैं। कूड़े के ढेरों की तरफ न तो नगर निगम और न ही प्रदूषण बोर्ड का ध्यान है। लापरवाह अफसरों को एनजीटी के आदेशों की परवाह नहीं है। एनजीटी ने नदियों पर कूड़ा फेंकने पर रोक लगाई है। इस बारे में क्षेत्रीय प्रदूषण बोर्ड के अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका।