स्पोर्ट्स स्टेडियम में बने बैडमिंटन हॉल की छत जर्जर हो चुकी है। जिसके चलते बरसात में पानी कोर्ट में आने से खिलाड़ियों को खेलने में काफी दिक्कतें होती हैं। बारिश के पानी से कोर्ट में बना लकड़ी फर्श भी जगह-जगह से खराब हो गया है।
छत की मरम्मत कराने के लिए उपक्रीड़ाधिकारी ने डीएम को प्रस्ताव भेजकर बजट की मांग की है।
स्टेडियम का बैडमिंटन हॉल वर्ष 1992 में बना था। लेकिन उसके बाद से ही इसकी मरम्मत नहीं कराई गई है। हॉल की छत पर डाली गई टिन की चादरें गलने के साथ ही शीशे भी टूट गए हैं। चादरें गलने की वजह से बरसात में पानी हॉल में पहुंच जाता है।
पानी आने से लकड़ी का फर्श कई जगहों से उखड़ने के साथ ही फूल भी गया है। हॉल में होने वाली प्रतियोगिताओं में जनप्रतिनिधि और अधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन किसी ने भी इसकी सुध नहीं ली है। भवन के मेन गेट की छत का प्लास्टर भी उधड़कर गिरता रहता है।
उपक्रीड़ाधिकारी निर्मला पंत ने बताया कि बैडमिंटन हॉल में रोजाना 50 से अधिक रजिस्टर्ड खिलाड़ी खेलने आते हैं। विभागीय अधिकारी भी यहां खेलते हैं। उन्होंने बताया कि हॉल की छत और फर्श की मरम्मत का प्रस्ताव विधायक हरभजन सिंह चीमा के मार्फत डीएम को भेजा गया है। बजट मिलने पर छत की मरम्मत कराई जाएगी।
गेट से भीतर आता है गंदा पानी
स्पोर्ट्स स्टेडियम गेट के सामने से कई घरों का पानी स्टेडियम परिसर में आता है। निकासी की व्यवस्था न होने से गंदा पानी स्टेडियम के भीतर आकर जमा हो गया है। रोजाना यहां कई खिलाड़ी और लोग मार्निंग वॉक, ईवनिंग वॉक के साथ ही खेलने आते हैं। जिनको गेट के सामने से बह रहे गंदे पानी से होकर स्टेडियम में आना-जाना पड़ता है। गंदे पानी के जमा होने से दुर्गंध उठती है।