परिवहन विभाग को रोजाना लाखों रुपये की आमदनी देने वाले रोडवेज डिपो के भवन को मरम्मत की दरकार है। बारिश होने पर भवन के कई कक्षों में पानी टपकने से दस्तावेजों के खराब होने का खतरा रहता है। दीवारों में पानी रिसने से ईबीटीएम मशीन को चार्ज करते समय कई बार करंट आ जाता है। कई बार मांग करने के बाद भी मरम्मत के लिए शासन से बजट नहीं मिल पा रहा है।
रुद्रपुर मार्ग पर स्थित रोडवेज डिपो का उद्घाटन वर्ष 1982 में तत्कालीन केंद्रीय उद्योग मंत्री नारायण दत्त तिवारी ने किया था। वर्तमान में डिपो से 30 बसों का नियमित संचालन होता है। यूपी के जमाने में भवन की मरम्मत के छुटपुट कार्य हुए, लेकिन राज्य बनने के बाद मरम्मत के नाम पर कुछ नहीं हो सका। हालांकि डिपो के लिए मिलने वाले खर्चे में से ही भवन के बाहरी हिस्से में करीब डेढ़ साल पहले रंग रोगन कराया गया था, लेकिन मरम्मत की आज भी भवन बाट जोह रहा है।
ट्रेजरी कक्ष, कंप्यूटर कक्ष, डीजल कक्ष, समय संचालन कक्ष के साथ कई और कक्षों की छतें भी बरसात में टपकती हैं। जिससे दस्तावेजों के खराब होने की संभावना बनी रहती है। लेखा कक्ष का भी प्लास्टर उखड़ना शुरू हो गया है। कंप्यूटर कक्ष में बारिश में ईबीटीएम मशीन चार्ज करने में करंट भी आ जाता है। कई बार कर्मचारियों को हल्के झटके भी लग चुके हैं।
। डिपो भवन के साथ ही शौचालय भवन भी बुरी स्थितियों में है। शौचालयों के दरवाजों से कुंडे गायब हैं और रस्सी से बांधकर किसी तरह काम चलाया जा रहा है। कुछ में तो दरवाजे भी गल चुके हैं। जिससे यात्रियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। डिपो की गैलरी और भवन के चारों ओर लंबी उग आई हैं। उसको कटवाने के लिए भी डिपो के पास पैसा नहीं है।
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एआरएम महेंद्र कुमार ने बताया कि उन्होंने भवन की मरम्मत और रंग रोगन के लिए प्रस्ताव आला अधिकारियों को भेजा था, लेकिन बजट नहीं मिल सका है। इससे पहले भी कई बार पत्र लिखकर बजट की मांग की जा चुकी है। बजट के लिए और पत्र भेजा जाएगा। मरम्मत नहीं होने से भवन की हालत खराब हो रही है।