रुद्रपुर में प्रेस वार्ता करते भारतीय ग्रैंड मास्टर प्रवीण थिप्से।
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अर्जुन पुरस्कार विजेता शतरंज के ग्रैंड मास्टर प्रवीण थिप्से ने कहा कि शतरंज के खिलाड़ियों के लिए अब अवसर बढ़े हैं। विश्व के करीब 190 देशों में खेले जाने वाले इस खेल में भारत लगातार पहचान बना रहा है। प्रवीण ने राष्ट्रीय स्तर पर 22 वर्ष तक भारत का प्रतिनिधित्व किया है। नौ बार के राष्ट्रीय चैंपियन थिप्से ने एशियन गेम्स में दो और कॉमनवेल्थ में एक गोल्ड जीता।
रुद्रपुर के कॉन्फ्लूएंस वर्ल्ड स्कूल में चल रही राष्ट्रीय शतरंज प्रतियोगिता में पहुंचे अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी प्रवीण थिप्से ने कहा कि उत्तराखंड में सद्भव रौतेला और जसमायरा गुंबर जैसे शतरंज के प्रतिभाशाली खिलाड़ी सामने आ रहे हैं। यह उत्तराखंड जैसे राज्य के लिए शुभ संकेत है। कहा कि शतरंज का खेल बगैर भव्यता और कम संसाधनों में आयोजित हो सकता है। शतरंज को खिलाड़ी सिर्फ कॅरिअर के रूप में न लेकर इससे रोजगार भी प्राप्त कर सकते हैं।
भारतीय ग्रैंड मास्टर और विश्व चैंपियन विश्वनाथन आनंद के सीनियर रहे थिप्से ने कहा कि उन्होंने वर्ष 1985 में आनंद को पराजित किया था, लेकिन उन्हें आनंद जैसी शोहरत व स्टारडम न मिलने का कभी मलाल नहीं रहा। उन्हें 1984 में अर्जुन अवार्ड से सम्मानित किया गया यह उनके लिए बड़ी उपलब्धि है। वर्ष 1997 में स्पोर्ट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया ने उन्हें साल का सबसे बेहतरीन खिलाड़ी चुना गया। प्रेस वार्ता में धीरज रघुवंशी, संजीव चौधरी, पुनीत छाबड़ा, मृत्युंजय सिंह आदि मौजूद रहे।