शक्तिफार्म के बैकुंठपुर में रोके गए खनन मजदूर।
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नैनीताल जनपद में हल्द्वानी के निकट गोरापड़ाव में खनन का काम करने वाले 174 मजदूरों को यहां बैकंठपुर गांव के समीप ग्रामीणों ने रोक लिया। यूपी और बिहार राज्य में रहने वाले यह मजदूर मंगलवार आधी रात के बाद ही खनन क्षेत्र में बने अपने झालो से डोली वन रेंज होते हुए पैदल ही अपने घरों के लिए निकल पड़े थे।
सूचना पाकर मौके पर पहुंचे शक्तिफार्म चौकी प्रभारी संजीत कुमार यादव ने जिला पंचायत सदस्य पति रविन्द्र सिंह, भागवत कथावाचक रामचंद्र राय एवं स्वामी विवेकानंद योग संस्थान के कार्यकर्ताओं की मदद से इन मजदूरों के लिए गांव के सरकारी स्कूल में भोजन की व्यवस्था की।
इस दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखा गया। संजीत कुमार ने मामले से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। इन मजदूरों में शामिल गाजीपुर निवासी मंगल राजभर ने बताया कि अधिकांश मजदूर यूपी के गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़ और गोरखपुर जनपद से हैं। कुछ मजदूर बिहार राज्य के बेतिया जनपद के भी हैं।
उन्होंने पुलिस को करीब 50 और मजदूरों के जंगल के रास्ते में होने की जानकारी दी। मजदूर मंगल ने बताया कि लॉकडाउन के बाद खनन क्षेत्र में बने झाले में रहते हुए करीब 48 दिन बीत चुके हैं। इस दौरान उन्हें दो ही बार मदद के रूप में कुछ चावल उपलब्ध कराए गए थे। मजदूरी कर कमाए रुपए भी समाप्त होने से सभी भयभीत व सशंकित थे।
उन्हें यहां लाने वाले ठेकेदारों के फोन अब स्विच ऑफ आने लगा है। शासन प्रशासन के नुमाइंदों से कई बार गुहार लगाने के बावजूद भी घर भेजने की कोई व्यवस्था ना होने पर वह मंगलवार आधी रात के बाद अपने झालो से चुपचाप निकलने के लिए मजबूर हुए हैं।
सरकारी स्कूल में रोके गए मजदूर अपने घर जाने की रट लगाए हुए हैं। उनका कहना है कि सभी मजदूरों का दो-दो बार स्वास्थ्य परीक्षण किया गया हैं। उन्हें घर जाने की इजाजत दी जाए। वह पैदल ही छह-सात सौ किमी दूर अपने घर पहुंच जाएंगे। प्रशासन के लिए भी इतनी संख्या में मजदूरों को रोककर रखना आसान नहीं होगा।