रुद्रपुर। तराई के वातावरण में वाहनों का प्रदूषण जहर घोल रहा है। बीते दो महीने में वायु प्रदूषण के 278 और ध्वनि प्रदूषण के 86 मामले सामने आए हैं। हर साल वाहनों के प्रदूषण के हजारों मामले पकड़ में आ रहे हैं।
वाहनों से होने वाला वायु और ध्वनि प्रदूषण स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए बेहद खतरनाक है। इससे अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी, सुनने की क्षमता में कमी और मानसिक तनाव होता है। बावजूद इसके वायु और ध्वनि प्रदूषण के खतरों को वाहन संचालक दरकिनार कर रहे हैं। इसकी तस्दीक परिवहन विभाग के आंकड़े कर रहे हैं।
परिवहन विभाग के उप संभाग में बीते मई माह में वायु प्रदूषण के 143 और ध्वनि प्रदूषण के 47 मामले सामने आए। उससे पहले अप्रैल में वायु प्रदूषण के 135 और ध्वनि प्रदूषण के 39 मामले सामने आए। बात वर्ष 2025-26 की करें तो पूरे वित्तीय वर्ष में परिवहन विभाग के उप संभाग में वायु प्रदूषण के 1941 और ध्वनि प्रदूषण के 683 मामले पकड़ में आए थे। वर्ष 2024-25 में वायु प्रदूषण के 1291 ध्वनि प्रदूषण के 1527 मामले सामने आए थे। इन आंकड़ों से साफ है कि वाहनों से फैल रहे प्रदूषण पर रोक नहीं लग पा रही है। संवाद
वायु प्रदूषण के नुकसान
वाहनों से निकलने वाले धुएं से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के संक्रमण जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं। हवा में मौजूद जहरीले कण रक्तप्रवाह में मिलकर दिल के दौरे और स्ट्रोक का खतरा बढ़ाते हैं।
पर्यावरण को नुकसान
ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन से ग्लोबल वार्मिंग बढ़ती है। अम्लीय वर्षा (एसिड रेन) से पेड़-पौधों इमारतों को नुकसान पहुंचता है।
ध्वनि प्रदूषण के नुकसान
ध्वनि प्रदूषण से श्रवण शक्ति कम होती है। लगातार तेज हॉर्न और इंजन की आवाज सुनने से कान के पर्दे को नुकसान पहुंचता है। बहरापन हो सकता है।
कोट
वायु और प्रदूषण से अस्थमा, फेफड़ों की बीमारी, सुनने की क्षमता में कमी आ सकती है। यह अनिद्रा का भी कारण बन सकता है। प्रदूषण से बचाव करना चाहिए। - प्रो. ऊषा रावत, प्राचार्य राजकीय मेडिकल कॉलेज
कोट
वाहनों की चेकिंग के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण की उपकरणों के माध्यम से जांच की जाती है। मानक में खरे न उतरने पर संबंधित वाहन संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। - नवीन सिंह एआरटीओ प्रवर्तन रुद्रपुर