पंतनगर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा 70 के दशक में विकसित की गई विभिन्न फसलों की 13 किस्मों को लैंडमार्क यानि विशिष्ट प्रजातियां घोषित किया गया है। विवि के कुलपति डॉ. जे कुमार ने 13 प्रजातियों को लैंडमार्क (युगांतरकारी) प्रजातियां घोषित किये जाने की खुशी में विवि के प्रजनक वैज्ञानिकों को सम्मानित किया।
इस मौके पर बताया गया कि वर्ष 1980 से पहले यानि 70 के दशक में विकसित इन प्रजातियों को 11 फरवरी को दिल्ली में आयोजित इंडियन सोसायटी ऑफ जैनेटिक्स एण्ड प्लांट ब्रीडिंग के प्लेटिनम जुबली समारोह में लैंडमार्क घोषित किया गया। पंतनगर विश्वविद्यालय की लैण्डमार्क 13 प्रजातियों में गेहूं की कल्याणसोना, सोनालिका, यूपी 262, धान की नगीना 22, टाईप 3, चना की पंत जी 114, मसूर की पीएल 406, सरसों की क्रांति, सोयाबीन की शिलाजीत, अंकुर, पीके 472, मूंग की पंत मूंग 2 और अरहर की यूपीएएस 120 शामिल हैं।
कुलपति डॉ. जे कुमार ने कहा कि देश के सभी कृषि विश्वविद्यालयों द्वारा वर्ष 1980 से पहले विकसित लैण्डमार्क 53 प्रजातियों में पंतनगर विश्वविद्यालय की 13 प्रजातियों को सम्मान मिला है। इन 13 प्रजातियों ने हरित क्रांति में महत्वपूर्ण योगदान देने के साथ साथ पोषक भोजन उपलब्ध कराने में भी अहम भूमिका निभाई है। इनमें से कई प्रजातियां अपने विशेष गुणों के कारण अभी भी किसानों द्वारा पसंद की जाती हैं। इस मौके पर अधिष्ठाता कृषि डॉ. डीएस पांडे, कार्यवाहक निदेशक शोध डॉ. रमेश चंद्र, संयुक्त निदेशक कृषि वानिकी शोध केंद्र डॉ. सलिल तिवारी, संयुक्त निदेशक शोध डॉ. जयंत सिंह, पंतनगर एग्रीकल्चर एल्यूमनाई सोसायटी (पास) के सचिव डॉ. जेपी जायसवाल ने विचार रखे। इस मौके पर डॉ. पुष्पेंद्र सिंह, डॉ. अशोक, डा. कामेंद्र सिंह, डॉ. एसके वर्मा, डॉ. एसपी सिंह, डॉ. सुरेंद्र सिंह, डॉ. सलिल तिवारी, डॉ. अंजू अरोरा समेत 17 प्रजनक वैज्ञानिकों को सम्मानित किया गया।