श्रमिक असंतोष के चलते चर्चाओं में रही श्री श्याम पेपर मिल कानूनी पचड़ों से उबर नहीं पा रही है। मिल प्रशासन ने श्रमिकों के वेतन भत्ते के करोड़ों रुपये तो दबाए ही, साथ ही बैंकों से लिया गया लोन भी नहीं चुकाया। जिस वजह से बैंकों ने मिल की संपत्ति को कब्जे में ले लिया है। मिल से गलत तरीके से श्रमिकों की छंटनी का मामला लेबर और सिविल कोर्ट में चल रहा है। मिल में उत्पादन भी कई महीनों से बंद पड़ा है, जिस वजह से उसके भविष्य को लेकर श्रमिकों में संशय बना हुआ है।
दरअसल मुरादाबाद रोड स्थित श्री श्याम पेपर मिल पर सैकड़ों श्रमिकों का करोड़ों रुपयों के वेतन, भत्ता बकाया है। श्रमिकों की शिकायत पर श्रम विभाग ने मिल के खिलाफ तीन आरसी जारी की थी। एक मामले को मिल प्रबंधन ने श्रमिकों को भुगतान कर सुलझा लिया था। 1 करोड़ 89 लाख रुपये की आरसी के मामले में तहसील प्रशासन ने मिल की करीब 4 एकड़ जमीन कुर्क कर नीलामी कराई थी। नीलामी से मिले 1 करोड़ 29 लाख रुपयों से श्रमिकों को बकाया भुगतान किया जा रहा है। श्रमिकों के वेतन, भत्तों की 1 करोड़ 23 लाख रुपये की जारी आरसी के मामले में अभी प्रशासन ने रिकवरी की कार्यवाही नहीं की है।
लेबर इंस्पेक्टर केके गुप्ता ने बताया कि मिल की जमीन नीलामी से मिले रुपयों से श्रमिकों का बकाया भुगतना किया जा रहा है। अब करीब 40 श्रमिक ही बचे हैं, जिन्हें भुगतान होना है। बीते अप्रैल में मिल प्रबंधन ने 17 श्रमिकों की छंटनी की थी। जिसका मुकदमा सिविल के साथ ही लेबर कोर्ट में चल रहा है। कहा कि मिल ने 10-11 बैंकों का ऋण नहीं चुकाया था।
इन बैंकों का मिल पर करीब 771 करोड़ का बकाया है। जिस वजह से बैंकों ने कुछ दिन पहले मिल को अपने कब्जे में ले लिया है। बैंकों ने मिल के गेट के बाहर सिक्योरिटी गार्ड भी तैनात कर दिया है। विभाग की ओर से जारी एक और आरसी की तहसील प्रशासन ने रिकवरी करानी है। मिल में उत्पादन करीब 8 महीने से बंद पड़ा है। मिल चलेगी या नहीं, इस पर मालिकों ने कोई फैसला नहीं किया है। श्रमिकों में भी मिल को लेकर संशय है।