उत्तराखंड की सुंदरता उसके जंगल और पहाड़ हैं। प्रदेश के सभी लोग इन्हें सुरक्षित रखने की कल्पना करते हैं, लेकिन एक महिला ने कल्पना को हकीकत में बदलकर जंगलों में लगने वाली आग के मुख्य कारण का समाधान खोज निकाला है। इस समाधान से न सिर्फ जंगलों की आग बल्कि पेड़ों की कटाई पर भी काबू पाया जा सकेगा।
दरअसल, जंगलों में गर्मियों के दिनों में लगने वाली आग में चीड़ की सूखी पत्तियां बारूद का काम करती हैं। ऐसे में इन पत्तियों का सही विकल्प जैनब ने ढूंढ निकाला है। उन्होंने इसके लिए पेटेंट भी फाइल कर रखा है। ये पत्तियां नॉन-बॉयोडिग्रेडेबल के साथ ही ज्वलनशील होती हैं। इनकी वजह से आग तेजी से फैलती है। आग पर काबू पाने के लिए सरकार भी कई योजना चला चुकी है। इसके बावजूद हर साल जंगल धधकते हैं।
अब टिहरी के बौराड़ी में रहने वाली जैनब सिद्दीकी ने पिरूल का बेहतर विकल्प खोज निकाला है, जिससे आग लगने की संभावना कम होगी और पिरूल के इस्तेमाल से पेड़ों की कटाई पर भी असर पड़ेगा। दरअसल, जैनब ने पिरूल से वुडन बोर्ड तैयार करने का तरीका खोजा है। इन पत्तियों से मजबूत नॉन वुड रेजिड्यू फाइबर बोर्ड बनाए जाएंगे। जोकि मार्केट में उपलब्ध अन्य बोर्ड के मुकाबले अधिक मजबूत होंगे। इससे पत्तियों का सही उपयोग होगा और जंगलों में आग लगने की समस्या भी काफी हद तक कम होगी। जैनब ने बताया कि वह चीड़ के पत्तों के उपाय पर सात-आठ साल से रिसर्च कर रही थीं। कई प्रयासों के बाद वुडन बोर्ड का प्रयोग सही साबित हुआ।
पति व ससुरालियों की मदद से मिली ताकत
ऐसे तैयार होते हैं बोर्ड
चीड़ की पत्तियों और एग्रीकल्चर रेजिड्यू को एक साथ पीस कर इसमें प्राकृतिक रेजिन मिलाए जाते हैं। इसके बाद मशीन में इसे एक साथ तापमान और तय दबाव से गर्म और कंप्रेस किया जाता है। इस प्रकार इसमें मजबूती आती है। मार्केट में उपलब्ध पार्टिकल बोर्ड के मुकाबले इसकी मजबूती बेहतर है। साथ ही यह वाटर रेजिस्टेंस और फायर रेजिस्टेंस भी है। इन बोर्ड में स्क्रू होल्डिंग क्षमता भी है, जोकि मार्केट में उपलब्ध अन्य बोर्ड में नहीं होती है। इनसे डोर पैनल, विंडो, कैबिनेट, बुक सेल्फ, मॉड्यूलर किचन, डोर, फर्नीचर इत्यादि बनाए जा सकते हैं। जैनब ने बताया कि इसका इस्तेमाल वॉल पैनल और फ्लोर टाइल्स में भी किया जाएगा। इन बोर्ड पर लेजर प्रिटिंग, लेजर कटिंग भी हो सकती है। एक बोर्ड की कीमत करीब 30-35 रुपये प्रति स्क्वेयर फुट रहेगी। मार्केट में एमडीएफ और पार्टिकल बोर्ड भी इन्हीं कीमतों के आसपास उपलब्ध हैं।
किसानों से खरीदेंगी पराली व भूंसी
आईआईएम के सहयोग से मिला पांच लाख का सहयोग
आईआईएम काशीपुर के सहयोग से इस स्टार्टअप को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय से पांच लाख रुपये की फंडिंग मिली है। साथ ही उन्हें देवभूमि उद्यमिता योजना (डीयूवाई) से 75 हजार की सहयोग राशि मिली है। इन रुपयों से जैनब पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेंगी। अपनी इस रिसर्च के लिए वह पेटेंट फाइल कर चुकी हैं। एक साल के भीतर पेटेंट मिल जाएगा। वुडन एमडीएफ बोर्ड की डिमांड बहुत है। इसके लिए पेड़ काटे जा रहे हैं। जैव विविधता को बरकरार रखने में हमारा स्टार्टअप काफी सहयोगी साबित होगा। इसी के चलते हम दूसरे पेड़ों के पत्तों पर भी ट्रायल कर रहे हैं।