संयुक्त राज्य अमेरिका की सबसे बड़ी स्वच्छ तकनीक व्यापार प्रतियोगिता उत्तराखंड मूल के वैज्ञानिक और उद्यमी डॉ. शैलेश उप्रेती की कंपनी सीसीसीवि ने जीती है। न्यूयार्क राज्य की लेफ्टिनेंट गवर्नर कैथलीन होचूल ने शैलेश को भारी भरकम 5 लाख डालर का पुरस्कार दिया। 9 महीने तक चली प्रतियोगिता में 12 देशों की 176 कंपनियों ने हिस्सा लिया था।
मूल रुप से अल्मोड़ा जिले के मनान गांव के रहने वाले डॉ. शैलेश उप्रेती आईआईटी दिल्ली के छात्र रह चुके हैं। वैज्ञानिक होने के साथ कुछ साल पहले उन्होंने उद्योग की तरफ कदम बढ़ाया। वर्तमान में वह न्यूयार्क में बैट्री बनाने वाली सीसीसीवि कंपनी चला रहे हैं। उन्होंने वर्ष 2012 में साथियों के साथ उत्तराखंड के पहले इंटरनेट रेडियो की नींव रखी थी। न्यूयार्क राज्य ऊर्जा अनुसंधान और विकास प्राधिकरण की 76 वेस्ट स्वच्छ ऊर्जा प्रतियोगिता के तहत न्यूयार्क की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण सुधार के विकल्प पर कार्य करने के मिशन को बढ़ावा देने वाली देश और दुनिया की कंपनियों में प्रतिस्पर्धा कराई गई थी। डॉ. शैलेश की कंपनी के साथ ही 12 देशों की 176 कंपनियों ने हिस्सा लिया था।
जनवरी में शुरू हुई प्रतियोगिता करीब 8 चरणों से गुजरी और 6 अक्टूबर को पुरस्कार की घोषणा हुई थी। बीते 30 नवंबर को बिंघटम न्यूयार्क में लेफ्टिनेंट गवर्नर कैथलीन होचूल ने डॉ. शैलेश को पुरस्कार दिया। फोन में डॉ. शैलेश ने बताया कि उन्होंने ऐसी तकनीक को पेटेंट कराया है, जो न केवल लिथियम आयन बैट्री के जीवनकाल को 20 साल के लिए बढ़ाता है, बल्कि उसकी भंडारण क्षमता और शक्ति में सुधार के साथ ही आग या शार्ट सर्किट की स्थिति में उसका तापमान कम कर देता है। यह तकनीक अगली पीढ़ी के लिए ऐसे बैट्री तैयार करती है, जिससे सौर ऊर्जा को स्टोर करने के साथ ही बिजली से चलने वाली कारों, ट्रकों और बसों को चलाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। ऐसी बैट्री के निर्माण के लिए न्यूयार्क और विश्व स्तर पर कई कंपनियों को इस तकनीक का लाइसेंस दिया गया है। जो टेक्नोलॉजी हम विकसित करने की ओर अग्रसर हैं, वह प्लेटफार्म टेक्नोलॉजी से ली गई है।
डॉ. शैलेश उप्रेती ने बताया कि वह भारत में भी उन्नत लिथियम आयन बैट्री के निर्माण की योजना पर काम कर रहे हैं। मेक इन इंडिया अभियान के चलते भारत एक स्थाई सामाजिक और आर्थिक विकास के बदलाव को लाने को तैयार है। स्वच्छ भारत के बाद अगला मकसद हरित भारत हो सकता है। जिसमें देश की बिजली और परिवहन आवश्यकताओं को हरित ऊर्जा के विकल्पों में बदला जा सकता है। बैट्री अच्छा भविष्य है और वे डीजल और पेट्रोल की जगह लेकर रहेंगे।