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राज्य की पहली कुक्कुट नस्ल उत्तरा

Fri, 05 Oct 2018 12:03 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/ऊधमसिंह नगर
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पंतनगर में विकसित मुर्गी की उत्तरा फाउल प्रजाति। - फोटो : अमर उजाला
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पंतनगर कृषि विवि की ओर से विकसित मुर्गी की उत्तरा फाउल प्रजाति अब उत्तरा नस्ल के रूप में जानी जाएगी। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद दिल्ली में बीते दिनों हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। पशु विज्ञान महाविद्यालय के अधिष्ठाता डॉ. जीके सिंह ने बताया कि परिषद की ओर से उत्तरा को देश की 19वीं कुक्कुट नस्ल एवं उत्तराखंड की पहली कुक्कुट नस्ल के रूप में पहचान दी गई है। 

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महाविद्यालय के पशुधन उत्पादन प्रबंध विभाग के वैज्ञानिक डॉ. शिव कुमार, डॉ. आरके शर्मा, डॉ. डी कुमार, डॉ. अनिल यादव इस नस्ल पर पिछले 10 वर्षों से शोध कर रहे थे। वैज्ञानिकों की ओर से उत्तराखंड के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों से एक विशेष प्रकार के स्थानीय कुक्कुटों का चयन कर पंतनगर के शैक्षणिक कुक्कुट फार्म पर बैक यार्ड कुक्कुट पालन के लिए विकसित किया है। शोध टीम के टीम लीडर डॉ. शिव कुमार ने बताया कि उत्तरा फाउल गहरे काले रंग की है। 

इसके पैरों पर भी पंख होते हैं। सिर पर पंखों का गुच्छा (क्राउन) होता है, जो चोटीनुमा होता है। कुछ स्थानीय क्षेत्रों में इसे डोटियाल, बुलबुल, ताज मुर्गी के नाम से भी जाना जाता है। उत्तरा फाउल कठिन पर्यावरणीय परिस्थितियों, पहाड़ी एवं ठंडे क्षेत्रों में रहने के लिए अनुकूल है। उत्तरा फाउल में अंडों से चूजे निकालने और छोटे चूजों की देखभाल करने के आनुवांशिक लक्षण विद्यमान हैं। 
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शैक्षणिक कुक्कुट फार्म के सह निदेशक डॉ. अनिल यादव ने बताया कि वर्तमान में फार्म पर दो हजार से ज्यादा उत्तरा नस्ल के पक्षी हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में इसकी मांग बैक यार्ड फार्मिंग में बढ़ रही है। शैक्षणिक कुक्कुट फार्म के सहायक निदेशक (स्वास्थ्य) डॉ. राजीव रंजन कुमार ने बताया कि इस प्रजाति के कुक्कुटों में रोग-प्रतिरोधक क्षमता अन्य नस्लों की तुलना में अधिक होती है। 

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