सितारगंज। नेशनल हाइवे 74 के निर्माण में भूमि मुआवजा घोटाले की आंच सितारगंज तक पहुंच गई है। महिला अधिकारी समेत दो एसडीएम और पांच से अधिक कर्मचारी जांच के घेरे में आ गए हैं। राजस्व विभाग के अभिलेख जिला मुख्यालय में तलब करने से विभाग में भी खलबली मची है।
सितारगंज से काशीपुर तक फोरलेन, टनकपुर तक टूू लेन सड़क का निर्माण हो रहा है। सड़कों के निर्माण के लिए 2012, 2014-15, 2016 में अधिग्रहण के नाम पर बैकडेट से भूमि अकृषक कराने का मामला चर्चा में आया है। बताया जा रहा है तहसील क्षेत्र के अंतर्गत हाइवे निर्माण की जद में जो जमीन आई है, उस भूमि में मुआवजा बढ़ाकर लेने के लिए पांच साल पहले की तिथि में कृषि से अकृषक जमीन कराने की फाइल तैयार कर वाद दर्शाया गया और फिर जमीन को अकृषक घोषित कर दिया गया।
इसमें महिला अधिकारी समेत दो एसडीएम, आधा दर्जन कर्मचारी जांच के घेरे में हैं। शनिवार को एसडीएम कार्यालय के सभी अधिकारी, कर्मचारियों, तहसील के अधिकारी, कर्मचारियों को जिला मुख्यालय तलब किया गया। राजस्व विभाग के अभिलेख भी जिला मुख्यालय ले जाए गए हैं। इससे अधिकारी, कर्मचारियों में खलबली मची है।
भूमि मुआवजा घोटाले में दोषी माने जा रहे अधिकारी, कर्मचारी सितारगंज में तमाम लोगों से फोन पर संपर्क कर कार्रवाई की जानकारी भी ले रहे हैं। चर्चा है कि इनमें एक अधिकारी ने सितारगंज से खटीमा स्थानांतरण होने के बाद वहां भी अकृषक भूमि घोषित करने की झड़ी लगा दी।