काशीपुर उजाला अस्पताल में जच्चा बच्चा के साथ डॉक्टर व टीम।
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उजाला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ (एमडी) डॉ. प्रदीप सिंह ने एचएमडी बीमारी से ग्रसित नवजात शिशु को बचाकर परिवार के चेहरे पर खुशी की छटा बिखेरी है। सात दिन की कड़ी मेहनत के बाद नवजात शिशु को बचाया जा सका। सामान्यत: इस बीमारी से ग्रसित बच्चे को ठीक होने पर कम से 25 से 30 दिन लग जाते हैं।
गड्ढा कॉलोनी निवासी छाया को प्रसव पीड़ा होने पर 17 जुलाई को उजाला अस्पताल में भर्ती कराया गया। शिशु पैदा होने पर डॉ. प्रदीप सिंह ने उसे एचएमडी बीमारी से ग्रसित पाया गया। इसके अलावा नौ अन्य तरीके की बीमारियां भी निकलीं। उन्होंने शिशु का इलाज शुरू किया और सात दिन की कड़ी मेहनत के बाद अब बच्चा स्वस्थ है और मां का दूध पीने लगा।
सेहत में सुधार के बाद डॉक्टरों ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ (एमडी) डॉ. प्रदीप सिंह ने बताया कि इस तरह की बीमारी में ठीक होने पर 25 से 26 दिन तक लग जाते हैं, लेकिन सही इलाज और मेहनत से बच्चे को जल्द ही स्वस्थ कर दिया गया। उन्होंने बताया कि छाया को साढ़े सात महीने में ही प्रसव पीड़ा होने लगी थी।
अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. प्रसून कुमार ने बताया कि इस बीमारी का अन्य अस्पताल में इलाज कराने पर करीब डेढ़ से दो लाख रुपये तक का खर्चा आता है, लेकिन उजाला अस्पताल में लोगों को सुविधा देने के लिए इस बीमारी का खर्चा बहुत कम है। वहीं छाया ने बताया कि उसका पति एक मिल में मजदूरी करता है।
उजाला अस्पताल में इस बीमारी का बेहद कम खर्चे में इलाज होने की जानकारी होने पर वह उजाला अस्पताल में आए। छाया ने बताया कि वह पहले भी अपना एक बच्चा इसी बीमारी से खो चुकी हैं। बता दें कि पिछले कुछ महीनों से उजाला अस्पताल का बाल रोग विभाग इस तरह के कई मरीजों का कम समय में सफल इलाज कर चुका है।