काशीपुर। जेवर चमकाने के नाम पर ठगी करने वाले दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। दोनों ने काशीपुर और बाजपुर में ठगी की वारदातों को अंजाम दिया गया था। पुलिस ने ठगे गए सभी जेवर भी बरामद कर लिए हैं। पुलिस दोनों के आपराधिक इतिहास की जानकारी के लिए बिहार पुलिस के संपर्क में है।
मंगलवार को एएसपी दफ्तर में मामले का खुलासा करते हुए सीओ अक्षय प्रह्लाद ने बताया कि पुलिस को सौंपी तहरीर में वैशाली कॉलोनी निवासी मदन नारायण ने कहा था कि 22 अक्तूबर को सुबह के समय एक युवक उनके दरवाजे पर पहुंचा। उक्त युवक ने कहा कि उसकी कंपनी ने एक पाउडर तैयार किया है, जिससे तांबा, पीतल और टाईल्स साफ हो जाते है।
इसके बाद उसने पाउडर से सोने के जेवर चमकाने की बात भी कही। उनकी पत्नी हंसा ने उसे सोने के कुछ जेवर दे दिए। जेवर को एक कटोरी में डालने के बाद युवक ने कटोरी को गर्म करने को कहा और वहां से चला गया।
कुछ देर बाद वह एक अन्य युवक के साथ लौटा और फिर से कटोरी में एक पाउडर डालकर बर्तन को फिर गर्म करने को कहा और चला गया। युवक के जाने के बाद हंसा ने बर्तन खोलकर देखा तो उसमें से जेवर गायब थे। पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज कर ठगों की धरपकड़ के लिए आईटीआई थाना प्रभारी बीडी जोशी के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया।
ठगों की तलाश में जुटी टीम को सीसीटीवी फुटेज से कुछ सुराग मिले, जिसके आधार पर बीते सोमवार मुकुंदपुर तिराहे से दो युवकों को गिरफ्तार कर लिया। दोनों के पास से टीम ने मंगलसूत्र, सोने की अंगूठी और सोने की एक चेन बरामद की है।
ठगे गए जेवर बरामद हुए। पूछताछ में अभियुक्तों ने अपना नाम दिलखुश कुमार निवासी घेराबाड़ी, थाना कोड़ा जिला कटियार, बिहार और राजू कुमार निवासी मोर सांडा फलका जिला कटियार (बिहार) बताया। सीओ ने बताया कि अभियुक्तों ने काशीपुर के बाद बाजपुर क्षेत्र में भी ठगी की वारदात को अंजाम दिया था। दोनों के कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है।
पूरा गांव करता है ठगी का कारोबार
पूछताछ में पकड़े गए युवकों ने बताया कि वह मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं। उनके गांव के कई लोग मुरादाबाद और रामपुर क्षेत्र में रहते हैं और सभी लोग ठगी का काम करते हैं। काशीपुर से पहले उन्होंने रामनगर, रामपुर सहित कई जगहों पर भी वारदात को अंजाम दिया और जेवर बेचकर कुछ रुपये घर भेजे और कुछ अपने खर्चे के लिए रखे।
मुरादाबाद में होती थी पूरी प्लानिंग
ठगों का गिरोह मुरादाबाद में पूरी प्लानिंग तैयार करता था। बिहार से सबसे पहले यह लोग मुरादाबाद पहुंचते थे, फिर वहां से बाइक खरीदते थे और उसी बाइक से वारदात को अंजाम देने के बाद फिर वापस मुरादाबाद पहुंचकर बाइक को बेच देते थे। यहीं पर वह ठगी के जेवर भी बेचते थे। इसके बाद बिहार लौट जाते थे। लोगों को झांसे में लेने के लिए वह एक कंपनी का आईकार्ड भी अपने पास रखते थे।
चांदी चमकाने के काम से बढ़ी सुनारों से पहचान
आईटीआई थाना प्रभारी बीडी जोशी ने बताया कि पूर्व में इस समुदाय के लोग पुराने बर्तनों को चमकाने का काम करते थे। फिर इन लोगों ने चांदी चमकाने का काम शुरू किया। चांदी चमकाने के लिए यह जिस केमिकल का प्रयोग करते थे, उसमें काफी चांदी इनके हाथ लग जाती थी, जिसे वे लोग सुनारों को बेच देते थे। इसी से इनकी पहचान सुनारों से हुई। फिर इन लोगों ने सोना चमकाने के नाम पर ठगी शुरू कर उसे भी सुनारों को बेचना शुरू कर दिया।
खुलासा करने वाली टीम में ये रहे शामिल
एसआई मनोज देव, हेड कांस्टेबल अशोक चौधरी, कांस्टेबल मुकेश कुमार, कमल पाल, देवेंद्र बिष्ट, संदीप नेगी और रितु आर्य शामिल रहे।