काशीपुर। दिन भर मोबाइल पर रील स्क्रॉल करने वाले सिर्फ लाइक, कमेंट और शेयर करने तक सीमित हो गए हैं। अगर वह लाइक करने के बजाय कोई ठोस कदम उठाते, तो सुखवंत आज जीवित होता। विडंबना है कि उसकी वीडियो को शेयर करके लोगों ने तरह-तरह की टिप्पणी की लेकिन उसे बचाने का प्रयास एक ने भी नहीं किया।
पैगा निवासी सुखवंत सिंह ने शुक्रवार को अपने फेसबुक अकाउंट मालवा जट पर एक वीडियो शेयर किया था। इस वीडियो की शुरुआत ही उन्होंने इस बात से की थी कि मैं एक किसान हूं और मैं मर चुका हूं। आप यह वीडियो मेरे मरने के बाद देख रहे हैं।
वीडियो जारी करने के दो दिन बाद उन्होंने गोली मारकर अपनी जान दी। उनके इस वीडियो को 280 लोगों ने लाइक किया और 208 लोगों ने शेयर किया। किसी ने भी यह संवेदना नहीं दिखाई कि उनके परिजनों या उनसे बात की जाए। आखिर उनकी बात समझकर उन्हें न्याय दिलाने का प्रयास किया जाए।
सोशल मीडिय पर एक्टिव रहने वाले साइबर सेल ने भी मामले की गंभीरता को नहीं समझा। अगर किसी ने वीडियो को शेयर और लाइक करने से आगे की सोची होती तो शायद एक 12 वर्षीय पुत्र के पिता एक किसान जिंदा होते। उनकी मौत की खबर आज सोशल मीडिया पर सुर्खियों में बनी है। वहीं उनके आरोपों की अगर जांच पड़ताल के लिए पुलिस पहले ही उनसे संपर्क करती तो शायद वह जिंदा होते।