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तीन माह बाद जीएसटी लागू होने से भी सिडकुल पर डबल मार

Tue, 28 Mar 2017 12:17 AM IST
भास्कर पोखरियाल/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
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जीएसटी - फोटो : अमर उजाला
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उत्पादन शुल्क में छूट की सीमा खत्म होने और ठीक तीन माह बाद जीएसटी लागू होने से भी पंतनगर सिडकुल पर सीधे तौर पर करोड़ों रुपये की मार पड़ेगी। इसमें जहां कंपनियों को अपनी पूरी स्टेशनरी बदलनी होगी वहीं कागजी कार्रवाई और कंसल्टेंटों पर कई करोड़ का खर्चा व्यय करने से भी भारी नुकसान उठाना पड़ेगा। केंद्र सरकार यदि तीन माह तक भी उत्पादन शुल्क पर छूट जारी रखती तो पंतनगर सिडकुल के उद्योगों को काफी राहत मिल सकती है।
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टाटा, बजाज, महेंद्रा, अशोक लीलैंड के लिए पार्ट्स तैयार करने वाली कंपनियों के प्रबंधनों के मुताबिक तीन माह बाद लागू होने वाले जीएसटी के कारण भी उद्योगों पर डबल मार पड़ेगी। करोड़ों रुपये के टैक्स के घाटे को मजबूरन उद्योगों को झेलना पड़ रहा है। यदि उत्पादन शुल्क पर केंद्र से मिलने वाली छूट तीन माह तक भी निरंतर जारी रहती तो उद्योगों को राहत मिल सकती थी। 

करीब दस साल पहले पंतनगर सिडकुल में बजाज, टाटा, अशोका लीलैंड, महेंद्रा जैसी कंपनियों के लिए यहां सैकड़ों वेंडर कंपनियां आईं थीं। अब टैक्स की मार से वह भी परेशान हैं। बजाज के लिए स्पीडोमीटर तैयार करने वाली बडवे इंजीनियरिंग लिमिटेड के एचआर हेड उत्तम सिंह मटेला का कहना है कि जुलाई में जीएसटी लागू होना है, ऐसे में जीएसटी के दायरे के चलते कंपनियों के कागजी खर्चे ही लाखों से लेकर करोड़ों में आ जाएंगे। स्टेशनरी का खर्चा ही मात्र तीन माह के लिए एक बड़ा झटका है। इसलिए उत्पादन शुल्क की छूट सीमा तीन माह ही बढ़ा दी जाती है तो यहां की इंडस्ट्रीज को काफी हद तक लाभ मिलेगा। 
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वहीं अशोक लीलैंड के लिए पार्ट्स तैयार करने वाली फोनिक्स इंजीनियरिंग के फाइनेंस मैनेजर वीरेंद्र कुमार के मुताबिक उद्योगों को मिलने वाली छूट तीन माह तक कंटीन्यू रहती तो भी उद्योगों को राहत मिल सकती थी, लेकिन जुलाई में जीएसटी के लागू होने से अब उद्योगों पर डबल मार पड़ रही है, कागजी खर्चा ही करोड़ों रुपये में चला जाएगा। वहीं टाटा के लिए पार्ट्स बनाने वाली प्रीकॉल लि. के एचआर हेड मोहित कुमार का भी कहना है कि केंद्र सरकार को उत्पादन शुल्क में ज्यादा नहीं तो जुलाई तक छूट को बढ़ा देना चाहिए, इससे उद्योगों को होने वाला करोड़ों रुपये का घाटा से बचा जा सकता है।

फिलहाल पलायन के मूड में नहीं इंडस्ट्रीज
पंतनगर सिडकुल में करीब 450 से अधिक फैक्ट्रियां यहां पर अपना उत्पादन कर रही हैं, लेकिन उद्योग अब जुलाई से जीएसटी से जुड़ने के चलते तीन माह तक करोड़ों रुपये का घाटा उठाने को तैयार तो हैं, लेकिन फिलहाल पलायन के मूड में नहीं हैं। बड़वे इंजीनियरिंग लिमिटेड के एचआर हेड का कहना है कि कंपनियों का पंतनगर सिडकुल में बड़े पैमाने पर सैटअप लगे हैं, टाटा, अशोक लीलैंड, बजाज सहित कई बड़ी कंपनियां इतने बड़े सेटअप को छोड़कर नहीं जाएंगे।

पंतनगर सिडकुल का प्रोडक्ट महंगा हो जाएगा
पंतनगर सिडकुल में तैयार होने वाले प्रोडक्ट टैक्स में छूट खत्म होने महंगे हो जाएंगे और इसका असर सीधे तौर पर कस्टमर पर ही पड़ेगा। बजाज कंपनी के एक अधिकारी के मुताबिक एक बाइक ही सीधे तौर पर 3000 से 4000 रुपये महंगी होने वाली है। वहीं टाटा, अशोक लीलैंड जैसी कंपनियों के प्रोडक्ट भी महंगे होंगे और इसकी मार सीधे तौर पर कस्टमर पर ही पड़ेगी। यही हाल सिडकुल की फूड कंपनियों का भी रहेगा। 
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