भले ही निकाय चुुनाव अभी दूर हों, लेकिन नगर निगम के मेयर बनने का सपना संजोए संभावित दावेदारों ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। टिकट को लेकर परिक्रमा का दौर भी चलने लगा है। चुनाव लड़ने का मन बनाए बैठे भाजपा के तेजतर्रार नेता को जब तीन बच्चों वाला नियम रास्ते का रोड़ा लगा तो उन्होंने हाइकोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। उन्होंने जुड़वा बच्चों के मामले में सरकारी सेवक को मिलने वाली छूट की तर्ज पर उन्हेें भी चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी है। हाइकोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब भी मांगा है।
आजकल भाजपा और कांग्रेस के कई नेता जन समस्याएं सुनने के साथ ही सामाजिक कार्यक्रमों में भी सक्रिय नजर आ रहे हैं। इनमें शामिल एक भाजपा नेता भी मेयर का चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटे हैं, लेकिन उनके लिए तीन बच्चे समस्या बन गए हैं। नियमानुसार तीन बच्चों वाला व्यक्ति चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना गया है। अब यही नियम नेताजी के लिए सिरदर्द बना हुआ है। इसलिए उन्होंने चुनाव लड़ने की अनुमति देने के लिए हाइकोर्ट में याचिका दाखिल की है।
नाम न छापने की शर्त पर नेताजी ने बताया कि उनकी एक बेटी थी। वे दो बच्चे ही चाहते थे, लेकिन बेटी के बाद उनके जुड़वां बच्चे हुए। बताया कि करीब चार साल पहले तत्कालीन प्रमुख सचिव ने शासनादेश जारी किया था। इसमें एक बच्चे के बाद जुड़वां बच्चे होने पर सरकारी कर्मचारी को अतिरिक्त भत्ता अनुमन्य किया गया था। इसी शासनादेश के आधार पर उन्होंने चुनाव लड़ने की अनुमति मांगी है। इस संबंध में कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। फिलहाल अभी मामला कोर्ट में लंबित है।