गुरुद्वारा सिंह नानकमत्ता साहिब के प्रधान को लेकर दो गुटों में बंटे कार्यकारिणी सदस्यों में आपसी सहमति नहीं बन पाई। करीब साढ़े तीन घंटे की माथापच्ची के बाद समाधान नहीं निकलने पर डीएम ने 27 जून तक एसडीएम को रिसीवर नियुक्त कर दिया है। कार्यकारिणी सदस्यों को आमराय बनाने का वक्त दिया गया, ताकि 27 जून को प्रधान और जनरल सेक्रेट्री पद को लेकर आमसहमति से फैसला किया जा सके।
बृहस्पतिवार की शाम पांच बजे गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब प्रबंधन समिति का विवाद सुलझाने के लिए डीएम डॉ. नीरज खैरवाल, एसएसपी डॉ. सदानंद दाते और अपर जिला जज विवेक द्विवेदी ने संयुक्त रूप से दोनों पक्षों को अलग-अलग सुना। दोनों पक्षों की सुनवाई करने के बाद डीएम ने वीसी हॉल में उनकी बैठक लेते हुए कहा कि समय अवधि पूर्ण होने के बाद सरदार जसविंदर गिल प्रधान पद पर आसीन नहीं रह सकते हैं। कहा कि गुरुद्वारा प्रबंधन समिति की ओर से तीन सदस्य सरदार प्रीतम सिंह संधू, सरदार केहर सिंह और सरदार सेवा सिंह का निलंबन प्रकरण न्यायालय में लंबित है। इस प्रकार अधिसूचना के अनुसार उक्त तीनों सदस्यों को भी नवीन पदभार ग्रहण नहीं कराया जा सकता है। दोनों पक्षों में आम सहमति न होने पर डीएम ने निर्णय लिया गया कि तीन सदस्यों के निलंबन संबंधी प्रकरण के न्यायालय से निस्तारित होने तक या उक्त प्रकरण में सभी सदस्यों की आम सहमति होने तक 27 जून तक गुरुद्वारा प्रबंधन समिति नानकमत्ता के रिसीवर के रूप में एसडीएम सितारगंज निर्मला बिष्ट को नामित किया गया है। डीएम ने कहा कि 27 जून को कलक्ट्रेट के मीटिंग हॉल में दोबारा बैठक कर समिति के सदस्यों के सहमति से अग्रिम निर्णय लिया जाएगा। बैठक में एडीएम प्रताप सिंह शाह, एएसपी देवेंद्र पींचा, एसडीएम निर्मला बिष्ट, युक्ता मिश्रा, गुरुद्वारा समिति के जसविंदर सिंह गिल, सेवा सिंह, बलजिंदर सिंह, सूरत सिंह, प्रीतम सिंह संधू, केहर सिंह, सेवा सिंह, निशान सिंह, जरनैल सिंह, कुलदीप सिंह सहित सभी 27 सदस्य मौजूद रहे।
कलक्ट्रेट के तीनों गेट बंद, पुलिस का पहरा
रुद्रपुर। गुरुद्वारा श्री नानकमत्ता साहिब में प्रबंधन के मसले को लेकर कलक्ट्रेट में पुलिस प्रशासन की ओर से बुलाई गई वार्ता में टकराव की आशंका के तहत पुलिस अलर्ट रही। पुलिस ने कलक्ट्रेट में खड़े वाहनों को बाहर करने के साथ ही तीनों गेटों को बंद कर दिया। गेटों पर पुलिस तैनात करने के साथ ही चौपहिया और दोपहिया वाहनों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी गई। दोनों गुटों के समर्थकों का बाहर जमावड़ा लगा रहा। इसके अलावा जो लोग परिसर में पहले से मौजूद थे, उनमें से भी सिर्फ तस्दीक कर कार्यकारिणी सदस्यों को कलक्ट्रेट भवन के भीतर वीसी हॉल में तस्दीक करके भेजा गया था। एक अधिवक्ता ने भीतर जाने को लेकर सीओ से जिद की, लेकिन सीओ ने कड़ा रुख अपनाते हुए रोक दिया। हालांकि कुछ समय बाद अधिवक्ता को अंदर बुला लिया गया।