काशीपुर। चैत्र मास में लगने वाले ऐतिहासिक उज्जैनी शक्तिपीठ मां बाल सुंदरी के चैती मेला से हजारों भक्तों की आस्था जुड़ी हैं। मेले के दौरान निकाले जाने वाले डोले का रास्ता इतना खराब है कि इस बार ऊबड़-खाबड़ डगर आस्था की परीक्षा लेगी।
नवरात्र की सप्तमी की अर्द्धरात्रि मां भगवती का डोला मोहल्ला कानूनगोयान पंडा आवास से लगभग चार किमी की पैदल यात्रा करके मंदिर परिसर स्थित गर्भगृह पहुंचता है। गौविषाण टीले के बराबर से जाने वाला लगभग एक किमी का रास्ता बदहाल है। डोला उठाने वाले कहार व श्रद्धालु नंगे पांव मां के डोले के साथ पैदल जाते हैं। बीते कई वर्षों से पंडा परिवार व क्षेत्रवासी इस मार्ग को पक्का करने की मांग कर चुके हैं, लेकिन कुछ नहीं हुआ। मेयर दीपक बाली ने बताया कि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बाद युद्ध स्तर पर कार्य शुरू कराया जाएगा। प्रयास रहेगा कि रास्ते को समय से पहले बना दिया जाए।
मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री ने बताया कि चैती मेला 30 मार्च से शुरू हो जाएगा। देवी का डोला चार अप्रैल की अर्द्धरात्रि गर्भगृह में पहुंचेगा। अभी तक डोला मार्ग का पक्का निर्माण नहीं होने से श्रद्धालुओं के सामने समस्या खड़ी होगी। सूत्रों की मानें तो इस मार्ग का टेंडर 10 मार्च को खुलेगा। इसके बाद वर्क ऑर्डर समेत अन्य प्रक्रिया में एक सप्ताह का समय लगेगा। आखिर कैसे यह रास्ता इतने कम समय में पक्का हो सकता है।