साउथ अफ्रीका में जी-20 सम्मेलन के दौरान प्रतिभागियों के साथ संपदा तिवारी। विवि
पंतनगर। विवि परिसर निवासी और आरएएन पब्लिक स्कूल रूद्रपुर में कक्षा-12 की छात्रा संपदा तिवारी ने केवल 16 वर्ष की उम्र में विश्व स्तर पर भारत का मान बढ़ाया है। उन्हें यूनिसेफ इनोसेंटी की विश्व बाल रिपोर्ट-2025 के विमोचन में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए आमंत्रित किया गया था। जिसका आयोजन 20 नवंबर को अंतरराष्ट्रीय बाल दिवस पर दक्षिण अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में आयोजित जी-20 सोशल शिखर सम्मेलन के दौरान हुआ।
पंतनगर विवि में सह निदेशक शारीरिक शिक्षा डाॅ. भास्कर तिवारी और कृषि महाविद्यालय में सहायक प्राध्यापक डाॅ. रश्मि तिवारी की बेटी संपदा ने बताया कि यह शिखर सम्मेलन विश्व के प्रमुख नेताओं, नीति-निर्माताओं, युवा प्रतिनिधियों और सामाजिक संस्थाओं का बड़ा मंच है। इस मंच पर शिक्षा और सामाजिक नीति के भविष्य पर विचार होता है। इस कार्यक्रम में वह सबसे कम उम्र की वक्ताओं में शामिल हुई थीं। उन्होंने भारतीय युवाओं से जुड़े अनुभव, समस्याएं और उनका समाधान बहुत प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
उन्होंने बताया कि वह यूनिसेफ इनोसेंटी की ओर से चयनित विश्वस्तर के 15 यूथ फोरसाइट फेलोज में शामिल हैं। उनका चयन दुनिया के छह हजार से अधिक आवेदकों में हुआ था। वह इस सम्मान को पाने वाली सबसे कम उम्र की और पहली भारतीय हैं। संपदा ने बताया कि उनका शोध भारत की किशोरियों की शिक्षा में आने वाले संसाधन और तकनीक से जुड़ी कठिनाइयों पर केंद्रित है। उन्होंने कहा कि सीमित संसाधनों वाले क्षेत्रों में युवाओं के लिए भविष्य की शिक्षा को अधिक समावेशी और उपयोगी बनाने की आवश्यकता है। सम्मेलन में उन्होंने समुदायों से जुड़े वास्तविक अनुभव भी साझा किए।
-इन्सेट में
युवाओं के लिए बनीं प्रेरणास्रोत
उम्र कभी तय नहीं करती कि ठोस प्रयास का प्रभाव कितना होगा। मौका मिलने पर युवा दुनिया को बदल सकते हैं। जी-20 मंच पर संपदा की मौजूदगी ने न केवल उनका नाम रोशन किया, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की युवा पीढ़ी की सोच और क्षमता को भी मजबूत किया है। उनकी यह उपलब्धि देश के करोड़ों युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत बन गई है। संवाद