तराई में लंबे समय बाद माओवाद ने खामोशी तोड़ते हुए फिर दस्तक दी है। प्रतिबंधित संगठन भाकपा माओवादी ने गुपचुप ढंग से प्रेस नोट जारी कर नानीसार में जिंदल ग्रुप के निर्माणाधीन परिसर में हुई आगजनी और तोड़फोड़ की घटना की जिम्मेदारी ली है। उन्होंने नानीसार आंदोलन में शामिल संगठनों पर जनाक्रोश को गुमराह करने का आरोप मढ़ा है।
वर्ष 2005 में तराई में माओवाद ने जड़ जमाने की कोशिश की थी। जिसके बाद सकैनिया गदरपुर से अनिल चौड़ाकोटी, जीवन और नीलू बल्लभ को गिरफ्तार किया गया था। वर्ष 2007 में हंसपुर खत्ता नानकमत्ता से पुलिस ने प्रशांत राही को गिरफ्तार किया था। इसके अलावा कई और गिरफ्तारियां भी हुई थीं। लेकिन गिरफ्तारियों के बाद तराई में माओवाद की आहट फिर नहीं सुनाई दी।
इसी बीच 16-17 फरवरी की रात नानीसार में जिंदल ग्रुप के निर्माणाधीन इंटरनेशनल आवासीय स्कूल में हुई आगजनी और तोड़फोड़ की जिम्मेदारी भाकपा माओवादी ने लेते हुए सनसनी फैला दी है। प्रतिबंधित संगठन की जोनल कमेटी के प्रवक्ता विजय पहरु के हवाले से जारी विज्ञप्ति में 21 फरवरी को जारी किया गया है।
जिसमें पार्टी ने दावा किया है कि उनके जनमुक्ति छापामार सेना के योद्धाओं ने कटीले और करंटयुक्त तारबाड़ों, खूंखार कुत्तों और हथियारबंद बाउंसरों की आंखों में धूल झोंककर कुशल रणनीति से अपने काम को अंजाम दिया था। संगठन ने राजनैतिक पार्टियों को जनता की संपत्ति छीनकर दमनात्मक कार्यवाही करने पर मुंह तोड़ जवाब देने की धमकी भी दी है। विज्ञप्ति में साफ कहा गया है कि 29 फरवरी को आहूत बंद को स्थगित करने से साफ है कि क्षेत्रीय चुनावी दल और संगठन केवल जन आंदोलन को अपने-अपने वोट बैंक बढ़ाने के लिए इस्तेमाल कर रहे थे।
इन संगठनों और नेताओं ने हमेशा ही जनता को गुमराह करने का काम किया है। संगठन ने चुनौती दी है कि वह राजकीय हिंसा के खिलाफ प्रति हिंसा के रुप में सामने आई और आएगी। यह विज्ञप्ति हाथों के बजाय कंप्यूटर से प्रिंट कराकर भेजी गई है।