राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सर संघचालक मोहनराव भागवत ने कहा कि सभी एकजुट होकर अपने देश, अपनी संस्कृति और अपने स्वाभिमान की रक्षा करें। हमें विदेशों की नहीं, बल्कि अपने महापुरुषों की नकल करनी है। तभी हमारे भीतर स्वाभिमान कायम रहेगा। वह बारह राणा समिति के तत्वावधान में स्थापित महाराणा प्रताप की प्रतिमा के अनावरण के बाद लोगों को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि जिस तरह से राजा मान सिंह ने अपनी प्रजा की खातिर मुगल शासक अकबर की शर्त को स्वीकार कर लिया था। उस तरह से महाराणा प्रताप भी कर सकते थे, पर उन्होंने नहीं किया, क्योंकि उनको पराधीनता स्वीकार नहीं थी। उन्होंने अकबर से युद्ध किया तो अकबर ने महाराणा प्रताप की सेना में शामिल एक मुस्लिम को अपने धर्म का वास्ता देेते हुए साथ देने की बात कही। मगर मुस्लिम सैनिक ने इंकार कर दिया और बोला, राज्य की रक्षा पहला धर्म है। इसलिए मनुष्य का सबसे बड़ा धर्म राष्ट्र धर्म होना चाहिए। भागवत ने कहा कि हम अपने देश को विदेशों से भी कहीं अच्छा बनाएंगे। हम अपना धर्म नहीं छोड़ेंगे, अगर किसी दूसरे के धर्म में अच्छी बातें हैं तो उसे हम अपने धर्म में शामिल करेंगे। उत्तराखंड के पूर्व पुलिस महानिदेशक ज्योति स्वरूप पांडेय ने कहा कि खटीमा और उसके आसपास क्षेत्रों में बसे बारह राणा समुदाय के लोगों ने कभी पराधीनता स्वीकार नहीं की। लेफ्टीनेंट जनरल एमसी भंडारी ने कहा कि महाराणा प्रताप अदम्य साहस व वीरता के प्रतीक हैं। उन्होंने मुगल शासक अकबर की शर्तों को ठुकरा कर घास की रोटी खाना पसंद किया। इससे पहले सर संघ चालक भागवत को प्रतिमा अनावरण स्थल से मंच तक खुली जीप में लाया गया। जहां पर समिति के पदाधिकारियों ने अतिथियों को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। बच्चों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस मौके राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री शिव प्रकाश, वनवासी कल्याण आश्रम के क्षेत्रीय मंत्री डालचंद, विधायक राजेश शुक्ला, राजू भंडारी, डा. हरीश, नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट, प्रकाश पंत, सुरेश परिहार, विजय फुटेला, शिव अरोरा, भारत भूषण चुघ आदि थे।