सिपाही की पीठ पर एसओ को बैठाने के मामले में दोबारा जांच शुरू हो गई है। पीएचक्यू ने शुक्रवार देर रात फैक्स भेजकर बयानों के लिए दो सीओ और दो सिपाहियों को तलब किया तो चारों शनिवार को पीएचक्यू रवाना हो गए। चर्चा है कि एसएसपी को टारगेट करने की हरसंभव कोशिश की जा रही है।
बीते 24 जनवरी को सिपाही के कंधे पर एसओ आरसी मखौलिया को बिठाने के मामले में डीजीपी के आदेश पर डीआईजी जांच कर रिपोर्ट सौंप चुके हैं। लेकिन रिपोर्ट को सार्वजनिक किए बगैर आईजी दीपक सेठ को प्रकरण की नए सिरे से जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के आदेश दिए गए। जिसके बाद आईजी ने जांच शुरु कर दी। शुक्रवार की देर रात करीब 11 बजे एसएसपी कार्यालय में पीएचक्यू से आदेश पहुंचा।
जिसमें दो सीओ बीएस चौहान और राजीव मोहन के साथ ही दो सिपाहियों को शनिवार को बयानों के लिए शाम 3 बजे तक पहुंचने के आदेश दिए गए। आदेश मिलने के बाद शनिवार सुबह चारों लोग पीएचक्यू रवाना हो गए। सूत्र बताते हैं कि एसएसपी को जान बूझकर मामले में दोषी ठहराने की कोशिश की जा रही है। खासतौर पर एक ऐसे अधिकारी को बयान देने के लिए बुलाया, जिसके खिलाफ एसएसपी ने गंभीर मामले में जांच बिठा रखी है।
सबसे बड़ा सवाल यही खड़ा हो रहा है कि आखिर डीआईजी की जांच में ऐसी क्या खामी थी, जिसके बाद दूसरी जांच की जरूरत पड़ गई। वर्तमान में कुंभ ड्यूटी की वजह से बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी ड्यूटी पर हरिद्वार में तैनात हैं। जिले में सीमित संख्या में बचे अधिकारी और कर्मचारियों पर कानून व्यवस्था की जिम्मेदारी है। ऐसे में मॉक ड्रिल की जांच एक बार कराने के बाद फिर दूसरे अफसर से कराना चर्चाओं में बना है। इधर एसएसपी केवल खुराना कहते हैं कि फिलहाल इस प्रकरण में उनसे कोई बयान नहीं लिए गए हैं। दो सीओ और दो सिपाहियों को पीएचक्यू से बयानों के लिए बुलाया गया है।