रुद्रपुर। परिवहन विभाग का टेस्ट ड्राइविंग ट्रैक आवेदकों का कड़ा इम्तिहान ले रहा है। ट्रैक बनने के बाद चालक के लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोगों के टेस्ट पास करने की संख्या में काफी कमी आई है। आधे ही आवेदक टेस्ट पास कर पा रहे हैं।
परिवहन विभाग ने बीते जुलाई में एआरटीओ कार्यालय परिसर में अस्थायी टेस्ट ड्राइविंग ट्रैक बनाया। इससे पहले विभाग खुले मैदान में लाइसेंस के लिए आवेदन करने वाले लोगों के टेस्ट लेता था। अस्थायी टेस्ट ड्राइविंग ट्रैक में 10 जुलाई से टेस्ट लेने की प्रक्रिया शुरू हुई। हर दिन बड़ी संख्या में लोग चालक के लाइसेंस के लिए टेस्ट देने पहुंच रहे हैं। परिवहन विभाग के रीजनल इंस्पेक्टर की देखरेख में आवेदकों के टेस्ट लिए जा रहे हैं।
रीजनल इंस्पेक्टर संजय सिंह ने बताया कि प्रत्येक कार्यदिवस में दोपहिया वाहन के लिए औसतन 20 और चौपहिया वाहन के चालक के लिए आवेदन करने वाले 10 लोगों के टेस्ट लिए जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि टेस्ट को आधे ही लोग पास कर पा रहे हैं।
तो बगैर लाईसेंस चला रहे वाहन
ड्राइविंग लाइसेंस का टेस्ट देने के लिए हर आयु वर्ग के लोग पहुंच रहे हैं। आवेदकों में 18-20 साल के युवाओं, 30-40 आयु वर्ग के लोगों के साथ ही 50-52 साल के लोग भी ड्राइविंग लाइसेंस के लिए टेस्ट देने आ रहे हैं। इससे एक बात स्पष्ट रूप से सामने आ रही है कि अधिक आयु के लोग वाहन तो चला रहे हैं लेकिन उनके पास लाइसेंस नहीं हैं क्योंकि आवेदक वाहन चलाकर ही टेस्ट देने पहुंच रहे हैं।
कोट
ट्रैक पर आवेदकों का टेस्ट लेना अनिवार्य है। बगैर टेस्ट पास किए लाइसेंस जारी नहीं किया जा सकता है। टेस्ट में फेल होने वाले आवेदकों को नियमानुसार एक सप्ताह बाद फिर टेस्ट देने का मौका दिया जा रहा है। - मोहित कोठारी, एआरटीओ (प्रशासन) रुद्रपुर