रुद्रपुर। किच्छा के 10 वर्षीय हिमांशु की आपबीती किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं। एक भिखारी से डरा-सहमा बच्चा ट्रेन में चढ़ गया जो उसे परिवार से इतनी दूर ले गई कि मां-बाप 14 महीने तक रोते रहे।
पुलिस की यूएस नगर एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट को उसके लगभग 400 किलोमीटर दूर हरियाणा में होने का पता चला तो सकुशल लाकर परिजनों से मिलाया गया। हिमांशु को दोबारा पाकर माता-पिता की आंखें नम हो गईं। किच्छा के नई सुनेहरी निवासी हिमांशु (10) पिछले साल मई के महीने में अपने घर के बाहर से लापता हो गया था। परिजनों ने उसकी काफी खोजबीन की थी लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लग सका था। हिमांशु के ताऊ सूर्य प्रकाश शर्मा ने 11 मई, 2024 को कोतवाली में गुमशुदगी दर्ज कराई। एसएसपी मणिकांत मिश्रा ने बच्चे की तलाश के लिए विशेष टीम बनाई। टीम ने सीसीटीवी फुटेज, संभावित जगहों पर बच्चों की तलाश के साथ जगह-जगह पंफलेट लगवा दिए। इसके साथ ही सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से भी बच्चे की जानकारी प्रसारित करवाई गई।
इस बीच परिवार पर क्या बीत रही थी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। माता-पिता को उम्मीद न थी कि 14 महीने पहले घर से निकले बेटे का अब कभी पता लग पाएगा।
एसएसपी ने बताया कि बरेली के बहेड़ी क्षेत्र में चस्पा पंफलेट पर दर्ज मोबाइल नंबरों पर एक व्यक्ति ने हरियाणा पुलिस के दो लोगों के गुमशुदा बच्चे की तलाश में आने की सूचना दी। पंफलेट में छपी और हरियाणा पुलिस के पास मिली फोटो एक जैसी होना बताया गया।
इतना सुराग मिलते ही टीम ने छानबीन के बाद आरपीएफ अंबाला से संपर्क किया। पता चला कि हिमांशु नाम का बच्चा 11 मई, 2024 को रेलवे स्टेशन पर घूमता मिला था, जिसे बाल कल्याण समिति को सौंपा गया था। बच्चा राधा कृष्ण बाल आश्रम नारायणगढ़ हरियाणा में था। एएचटीयू की स्पेशल टास्क फोर्स पंचकूला ने बच्चे का ब्योरा वात्सल्य एप पर अपलोड होने की जानकारी दी। एप पर बच्चे की डिटेल की मिलान करने के बाद परिजनों से वीडियो कॉल पर बात कराई गई। फिर 16 जुलाई को एएचटीयू की टीम ने हरियाणा जाकर एएचटीयू पंचकूला के सहयोग से हिमांशु को उत्तराखंड लाने की औपचारिकताएं पूरी कीं और रुद्रपुर में परिजनों से मिला दिया। बच्चे को दोबारा अपने पास पाकर माता-पिता की आंखें नम हो गईं।