लोगों की सेहत की देखभाल के लिए बना अस्पताल खुद अपने मर्ज का इलाज नहीं ढूंढ पा रहा है। यहां का एकमात्र अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र करीब दो माह से अस्वस्थ डाक्टर के भरोसे है। अब डाक्टर की गृहणी पत्नी मरीजों को खुद दवाइयां लिख रही हैं।
यहां का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र डाक्टरविहीन होने पर विभाग ने वर्ष 2009 में बेहद अस्वस्थ डाक्टर प्रभात कुमार की तैनाती कर खानापूर्ति की थी। तत्कालीन विधायक नारायण पाल के विरोध के बाद विभाग ने खटीमा में तैनात डाक्टर एके बंसल को यहां संबद्ध कर दिया था।
डॉ. बंसल एमडी का कोर्स करने के लिए इस वर्ष दस जून को गोरखपुर चले गए। तब से अस्वस्थ डाक्टर प्रभात कुमार पर ही मरीजों की सेहत की जिम्मेदारी है। प्रभात कुमार को लंबे समय से ब्रेन ट्यूमर है। इस कारण वे ठीक ढंग से बैठ और लिख नहीं पाते। इस कारण अस्पताल में उनकी गृहणी पत्नी भी बैठती हैं।
कई बार वे मरीजों को खुद ही दवाइयां लिख देती हैं। उधर, पूर्व सीएम विजय बहुगुणा के पुत्र सौरभ बहुगुणा ने स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से डाक्टर की तैनाती की मांग की थी।
इस पर सीएमओ ने 26 जून को सितारगंज सीएचसी में तैनात तीन डाक्टरों को अस्पताल में बारी-बारी से यहां ड्यूटी का आदेश दिया था, लेकिन इस दौरान एक ही दिन महिला डाक्टर ने अपनी ड्यूटी की। जिला पंचायत सदस्य तारक मंडल ने शीघ्र ही डाक्टरों की तैनाती न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
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पत्नी के दवाई लिखने की जांच होगी
मुख्य चिकित्साधिकारी एसके जोशी ने कहा कि शक्तिफार्म में डाक्टरों की कमी के बारे में शासन को अवगत करा दिया गया है। डाक्टर उपलब्ध होते ही तैनाती की जाएगी। उन्होंने डाक्टर की पत्नी द्वारा पर्चे पर दवाई लिखे जाने के मामले की जांच की बात कही है। ब्यूरो