काशीपुर। जीवनदायिनी बहल्ला नदी में बहता केमिकल युक्त पानी की चपेट में कटईया गांव भी है। यहां पर भी हालात गंभीर है। ग्रामीणों का आरोप हैं यहां पर हर साल दो से तीन लोग कैंसर से पीड़ित हो रहे हैं और कुछ लोगों ने अपनी जान गवां दी है। बहल्ला नदी का पानी दूषित हो चुका है।
यूपी बॉर्डर से लगे हुए कटईया गांव की आबादी करीब दो हजार के आसपास है। डेढ़ किलोमीटर के दायरे में बहल्ला नदी बहती है और इसके बाद यूपी में प्रवेश करती है। नदी में केमियुक्त पानी बहने से गांव की फसलें खराब हो रही हैं और बोरिंग में भी पीने योग्य पानी नहीं आ रहा है। दूषित पानी पीने से गांव के अधिकांश के लोग बीमार हो रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि युवाओं से लेकर बुजुर्ग तक बीमार हो रहे है। हर साल एक से दो लोगों की कैंसर से मौत हो रही है, जबकि पीलिया, काला पीलिया सहित अन्य पेट रोग से लोग बीमार हो रहे है।
नदी से उठती दुर्गंध से ग्रामीण परेशान
बहल्ला नदी में बहते केमियुक्त युक्त पानी से उठती दुर्गंध से ग्रामीण परेशान है। ग्रामीणों की मानें तो नदी से उठती दुर्गंध की वजह से वे अपने मकान के अंदर ही रहते है। काम पर जाने के लिए नाक पर कपड़ा बांधकर निकलना पड़ता है। उनके घरों में मेहमानों ने आना-जाना भी बंद कर दिया है। कई बार प्रशासन से शिकायत करने के बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
कैंसर से इन लोगों ने गवाईं अपनी जान
कटईया ग्राम की प्रधान इकरा ने बताया कि बहल्ला नदी के केमियुक्त युक्त पानी से ग्रामीणों की जान पर बन आई है। इसी साल कैंसर की बीमारी से ताहिर हुसैन, अकबर अली, राधेश्याम की मौत हो चुकी है। इन सभी की उम्र 35 से 50 साल के बीच थी। यदि कोई जानवर नदी का पी लेता हैं, तो वह बीमार हो जाता है। कई जानवर की तो नदी के पानी पीकर मौत हो चुकी है।
यह बोले ग्रामीण......
समस्या को लेकर सीएम पोर्टल पर शिकायत की गई थी, शिकायत के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। गांव के लोग बीमार हो रहे है और प्रशासन ध्यान ही नहीं दे रहा है। नदी का पानी जहर में तब्दील हो रहा है और किसी को कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
- इमरान, प्रधान पति
गांव के लोग लगातार बीमार पड़ रहे है। स्वास्थ्य विभाग की टीम भी यहां पर लोगों की जांच पड़ताल करने नहीं आ रही है। नदी के पानी में बहते केमिकल को रोकना चाहिए, क्योंकि नदी किनारे बसे गांवों के ग्रामीण कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे है।
- गुरजेंट सिंह, ग्रामीण
बहल्ला नदी के पानी से यदि फसल की सिंचाई करते हैं, तो फसल नष्ट हो जाती है। नदी के पानी को अब सिंचाई के लिए भी उपयोग करने से डर लग रहा है। बारिश या बोरिंग के पानी से फसलों की सिंचाई करते है, तब जाकर गांव के खेतों में फसल उगती है।
- अभिषेक सिंह, ग्रामीण
केमिकल फैक्टरियों से निकलने वाले पानी को बहल्ला नदी में जाने से रोका जाना चाहिए। बीमारी से हर साल एक या दो लोगों की मौत हो रही है। इस ओर किसी का ध्यान नहीं है। प्रशासन को इस ओर प्रभावी कार्रवाई करनी चाहिए।
- दलेर सिंह, ग्रामीण
कोट -
कनकपुर, चनकपुर, कटईया और बरखेड़ी गांव में बहल्ला नदी के पानी से दूषित पानी से बीमार होने की जानकारी मिली है। मामला गंभीर है, ऐसे में जल्द ही स्वास्थ्य विभाग की इन गांवों में कैंप लगाकर ग्रामीणों की जांच पड़ताल करेगी।
- डा. केके अग्रवाल, सीएमओ ऊधम सिंह नगर