महिलाएं अब अबला नहीं हैं। रुद्रपुर के आवास विकास स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक मंजू देवी को उनके इस जोश और जज्बे के लिए 2007 में पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से राष्ट्रपति पुरस्कार भी मिल चुका है।
मूलरुप से बगवाली पोखर रानीखेत की मंजू देवी की बीटीसी करने के बाद पहली तैनाती प्राइमरी स्कूल शांतिपुरी में हुई। इस समय वे रुद्रपुर के आवास विकास स्थित प्राथमिक विद्यालय में प्रधानाध्यापक हैं। 29 साल तक सराहनीय सेवा करने वाली मंजू देवी का कार्यकाल भी राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त करने के बाद दो साल के लिए बढ़ाया जा चुका है। 2007 में राष्ट्रपति पुरस्कार के अलावा भी कई अवार्ड उन्हें मिल चुके हैं। 1995 में आवास विकास स्कूल में नियुक्त के दौरान स्कूल में न तो बाउंड्रीवाल थी और जमीन भी अतिक्रमण के गिरफ्त में थी। इस पर उन्होंने डटकर मुकाबला कर भूमि को अतिक्रमण से बचाया और जनसहयोग से बाउंड्री का निर्माण कराया। साथ ही स्कूल में बच्चों की साफ सफाई और घर के बच्चों की तरह पढ़ाने वाला माहौल तैयार किया।
उनके स्कूल में बनने वाले मिड डे मील का स्वाद भी घर के खाने की तरह ही होता है। यही वजह है कि 2004 में तत्कालीन डीएम गोपाल कृष्ण द्विवेदी की ओर से जिला स्तर पर सम्मानित होने के बाद उन्हें अवार्ड मिलते गए। शिक्षा क्षेत्र में सराहनीय व उत्कृष्ट कार्य के लिए राज्य स्तरीय अवार्ड, बेस्ट टीचर आफ उत्तराखंड अवार्ड, भारत ज्योति अवार्ड, राष्ट्रीय शिक्षा ज्योति अवार्ड, विद्यार्थी श्री अवार्ड, राष्ट्रीय विकास रत्न अवार्ड, इंटरनेशनल अचीवर, लाइफ टाइम सोशल डेवलेपमेंट अवार्ड, इंटरनेशनल गोल्ड स्टार अवार्ड, इंडो नेपाल सदभावना अवार्ड, इंदिरा गांधी एक्सीलेंस अवार्ड आदि उनके खाते में आ चुके हैं। मंजू देवी समाजसेवा के कार्यों में भी बढ़चढ़ कर शिरकत करती हैं। चाहे विधवा पेंशन लगवाना हो, गरीब कन्याओं की शादी में सहायता या विकलांगों की सहायता वे हर तरह से तत्पर रहती हैं।