रुद्रपुर। ऊधमसिंह नगर जिले में 900 कॉलोनियों को जिला विकास प्राधिकरण ने अवैध करार दिया है और निर्माण कार्य पर रोक लगा दी है। इस फैसले से सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हुई है जिन्होंने जीवनभर की जमा पूंजी घर बनाने में लगा दी। उनका सपना अब पूरा नहीं हो रहा है। इसे लेकर सियासत भी गरमा गई है।
सत्ता पक्ष और विपक्ष भी इस फैसले से असहज हैं। विपक्ष का कहना है जब कॉलोनियां कटी तब क्या प्राधिकरण सो रहा था। प्राधिकरण अवैध वसूली की नई दुकान बनकर रह गई है। जबकि सत्ता पक्ष का कहना है हम बीच का रास्ता निकालकर समस्या का हल कराएंगे। देखिए रिपोर्ट...
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जहां लोगों को बिजली, ड्रैनेज सिस्टम, पानी की समस्या का सामना करना पड़ रहा था वहां रोक लगाकर प्राधिकरण ने अच्छा कदम उठाया है। साथ ही जिन लोगों ने प्लाट लेकर आवास का निर्माण कार्य शुरू कर दिया है। उनका काम प्रभावित न हो। इसके लिए प्राधिकरण से बात कर बीच का रास्ता निकाला जाएगा। - शिव अरोरा, विधायक, रुद्रपुर
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सत्ता पक्ष के दबाव में कॉलोनाइजर कॉलोनियां काट रहे हैं। जब कॉलोनियां कट रही थीं तो क्या प्राधिकरण सो रहा था। जेई मौके पर जाकर निरीक्षण करता है लेकिन पैसे के आगे सचिव व अन्य अधिकारी चुप हो जाते हैं। दूसरी ओर अपनी जीवन भर की कमाई जमीन पर लगाने वाला व्यक्ति खुद को ठगा महसूस करता है। कॉलोनाइजर को प्लाट काटने से पहले पाबंद करना चाहिए। - राजकुमार ठुकराल, पूर्व विधायक
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हमने सीएम के समक्ष लोगों की समस्याओं को रखा है। यह भी कहा है कि 100-400 गज के नक्शे पास करने का जिम्मा नगर निगम को सौंप देना चाहिए व इससे आगे की कार्यवाही प्राधिकरण करता रहे। लोगों की समस्याओं का हल निकाला जाएगा। विकास शर्मा, मेयर, रुद्रपुर
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पहले शहर में नगर पालिका और गांव में जिला पंचायत मानचित्र पास करता था। तब व्यवस्थाएं आराम से चलती थीं। आज प्राधिकरण वसूली का अड्डा बन गया है। कमाई के लिए सरकार ने प्राधिकरण नाम से नई दुकान बनाई है। जो कम कम और वसूली ज्यादा करती है। प्राधिकरण का उद्देश्य सही नहीं है। - भुवन कापड़ी, विधायक खटीमा, उपनेता प्रतिपक्ष
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जब कॉलोनी कट रही थी तब क्या प्राधिकरण सो रहा था। अब दबाव बनाकर लूटखसोट करना चाह रहा है। प्राधिकरण का खेल खराब है जिससे जनता त्रस्त है। हमें इसका खुलकर विरोध करेंगे। - मीना शर्मा, कांग्रेस नेता व पूर्व पालिकाध्यक्ष।
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प्राधिकरण को सरकार ने लूट का अड्डा बना लिया है। आज किसी को घर बनाना है तो डेढ़ से दो लाख रुपये फ्री के देने पड़ते हैं। प्राधिकरण को खत्म कर देना चाहिए। - हिमांशु गावा, जिलाध्यक्ष कांग्रेस