रुद्रपुर। सरकारी गाड़ियों पर लाल-नीली बत्ती न लगाने के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की सरकारी कार पर लगी इमरजेंसी लाइट सवालों के घेरे में आ गई है। सीएमओ की कार के ऊपर लाल-नीली फ्लैश लाइट लगी हुई है जबकि नियमों के अनुसार यह सुविधा केवल आपातकालीन सेवाओं जैसे एंबुलेंस, पुलिस, फायर ब्रिगेड और आपदा प्रबंधन को ही है। सीएमओ का काम तो स्वास्थ्य विभाग के निरीक्षण, बैठक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं तक सीमित रहता है। ऐसे में उनकी सरकारी गाड़ी पर इमरजेंसी लाइट किस आधार पर लगाई गई, इसको लेकर सवाल उठ रहे हैं।
- गाड़ी पर लाइट इमरजेंसी सेवाओं के तहत लगाई गई है और स्वास्थ्य विभाग भी आपात सेवाओं से जुड़ा विभाग है इसलिए लाइट लगाई गई है। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ
- नियमों के अनुसार सीएमओ आपातकालीन सेवा की श्रेणी में नहीं आते इसलिए निजी या सरकारी गाड़ी पर लाल-नीली फ्लैश लाइट लगाना नियमों के अनुरूप नहीं है।- मोहित कोठारी, एआरटीओ
- यदि किसी अधिकारी की गाड़ी पर बिना वैधानिक अनुमति के ऐसी लाइट लगी पाई जाती है तो इसे नियमों का उल्लंघन माना जा सकता है। ऐसी स्थिति में संबंधित विभाग को कार्रवाई करने और लाइट हटवाने का अधिकार होता है। - नवीन ठुकराल, अधिवक्ता