नई उपखनिज भंडारण नीति से उपखनिज भंडारण कर्ताओं और स्टोन क्रशर में खलबली मची हुई है। अंदरखाने नीति का विरोध शुरू हो गया। जहां रिटेल भंडारण की अनुमति डीएम देंगे वहीं स्टोन क्रशर परिसर में भंडारण की अनुमति शासन देगा। यहां तक कि खड़िया के भंडारण में भी अनुमति लेनी होगी।
नई भंडारण नीति के मानकों के अनुसार नई नीति में शासन को 60 हजार प्रति एक हजार घनमीटर के हिसाब से भंडारण शुल्क देना होगा। पुरानी नीति के अनुसार भंडारण शुल्क दो साल के लिए सिर्फ एक लाख लिया जाता था। गौला से 54 लाख घनमीटर माल निकलता है, वहीं कोसी, शांतिपुरी और बाजपुर के अन्य पट्टों से 20 लाख घनमीटर माल निकलता है। अधिकतर माल नैनीताल और ऊधमसिंह नगर जिले के स्टोन क्रशर लेते हैं।
ज्यादातर स्टोन क्रशर पांच लाख घन मीटर से ऊपर उपखनिज खरीदते है, नई नीति के अनुसार उन्हें एक लाख घन मीटर में 60 लाख रुपये शासन को जमा करने पड़ेेंगे। वहीं भंडारण स्थल का न्यूनतम क्षेत्रफल भी पांच सौ वर्ग मीटर कर दिया गया है। नए नियमों के अनुसार रिटेल भंडारण की अनुमति जिलाधिकारी के कार्यालय से से लेनी होगी। वहीं स्टोन क्रशर के अंदर भंडारण की अनुमति शासन से मिलेगी।
इस नीति का स्टोन क्रशरों, पट्टाधारकों और स्टॉकिस्टों की ओर से विरोध होना शुरू हो गया है। स्टोन क्रशरों ने नीति न बदलने की दशा में यूपी बार्डर में स्टोन क्रशर शिफ्ट करने का मन बना लिया है। स्टोन क्रशर के मालिकों ने नाम न छापने पर बताया कि सरकार द्वारा तीन साल में तीन बार नई-नई नीति लागू की गई है। नई भंडारण नीति के लागू होने से उनके पास यहां से शिफ्ट होने के अलावा कोई चारा नहीं बचा है। कहा कि स्टोन क्रशर लगाने में एकमुश्त 10 लाख की लाइसेंस फीस देनी होती है। वहीं नई भंडारण नीति में प्रति एक हजार घनमीटर 60 हजार कहां से देंगे।