अपनी पत्नी को छोड़कर 23 साल पहले शहर में आ बसे एक अधेड़ को बीमारी की चपेट में आने बाद परिजनों की याद सता रही है। पूजा अर्चना कर जीवन यापन करने वाले इस अधेड़ को पड़ोस में रहने वाली आशा कार्यकर्त्री ने अस्पताल में भर्ती कराया। आशा कार्यकर्त्री इसकी देखरेख में जुटी हुई है।
वैशाली कालोनी निवासी पंडित खेमानंद उप्रेती (52) की बीते 14 अक्तूबर को अचानक तबियत बिगड़ गई थी। अकेले रहने वाले खेमानंद को पड़ोस में रहने वाली आशा कार्यकर्त्री मीना रावत ने सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया था। जांच में अधेड़ का हीमोग्लोबिन मात्र .05 ग्राम निकला। जिसके बाद से उनकी हालत लगातार बिगड़ रही है। अभी तक उनको दो यूनिट खून चढ़ चुका है।
खेमानंद ने बताया कि 23 साल पहले किसी बात को लेकर पत्नी से अलग होकर ग्राम निगाली देघाट अल्मोड़ा से यहां आकर बस गए थे। उन्होंने बताया कि उनकी पत्नी विद्या देघाट में आंगनबाड़ी में नौकरी करती है। उनकी एक बेटी बसंती है जो पढ़ाई कर रही है। उसने अभी तक बेटी को देखा तक नहीं है। उनकी इच्छा है कि वह उनसे एक बार आकर जरूर मिले। उनका एक भाई मोहन बाजपुर में रहता है। लेकिन काफी दिन हो गए, वह उसे देखने नहीं आया है।
उसके पास न तो उसका बीपीएल राशन कार्ड है और न ही मुख्यमंत्री स्वास्थ्य बीमा कार्ड बना है। अब वह अपने परिवार से मिलना चाहते हैं। सरकारी अस्पताल के फिजीशियन डॉ. राजीव गुप्ता ने बताया कि खेमानंद को एनीमिया बीमारी है। उनका हीमोग्लोबिन भी बहुत कम मात्रा में है। ब्लड चढ़ाने के बाद उनकी हालत में सुधार आया है। उनके परिवार को आकर बीमार की सेवा करनी चाहिए।