मुख्य बाजार में खड़े बेतरतीब वाहनों से शहर की ट्रैफिक व्यवस्था चौपट हो गई है। शहर के आम नागरिकों के साथ-साथ व्यापारियों की भी फजीहत हो रही है। स्थायी पार्किंग नहीं होने के कारण वाहन स्वामी अपने चौपहिया वाहन बाजार में ले जाते हैं जिसके चलते जाम लगता है। इससे पहले गांधी मैदान को पार्किंग स्थल के लिए चुना गया था। लेकिन प्रशासन ने बच्चों के खेलने के मैदान का हवाला देते हुए रद कर दिया था।
पूर्व एसएसपी केवल खुराना ने अपने कार्यकाल के दौरान शहर के सभी मुख्य मार्गों और बाजार में चौपहिया वाहनों के प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इससे बाजार में खरीददारी करने वालों को जाम से नहीं जूझना पड़ता था और व्यापारियों को भी राहत महसूस होती थी, लेकिन पिछले आठ महीने से शहर की हालत यह हो गई है कि मुख्य बाजार में बड़े-बड़े वाहनों का भी प्रवेश आसानी से हो जाता है। बाटा चौक में पुलिस की ड्यूटी में तैनात कुछ महिला पुलिस कर्मी भी कार चालकों को रोक पाने में नाकाम हैं।
फड़ व्यवसायी बाजार में सड़क किनारे फड़ लगाकर रास्ते को और तंग का देते हैं और इधर शाम ढलते ही बाजार में वाहनों की आवाजाही बढ़ जाती है जिससे बाजार में जाम लगना शुरू हो जाता है। बाजार में रहने वाले निवासियों को रिक्शे में बैठकर बस अड्डे या रेलवे स्टेशन तक जाना मुश्किल हो जाता है। इस बारे में नगर निगम की एमएनए दीप्ति वैश्य का कहना है कि शहर के मुख्य बाजारों के आसपास कोई ऐसी जगह नहीं है जहां पार्किंग की व्यवस्था की जा सके।
निगम ने कुछ महीनों के लिए बाजार में खरीददारी करने आने वाले चौपहिया वाहन चालकों के लिए गांधी पार्क में पार्किंग का ठेका दिया था, लेकिन शहर के ही लोगों ने बाद में इस पर आपत्ति जता दी। पार्किंग की समस्या है इस दिशा में प्रयास किया जाएगा।