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..तो समिति को ही नहीं द्रोणसागर के विकास में रुचि

Fri, 04 Dec 2015 11:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो/काशीपुर।
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तीर्थ द्रोणसागर के विकास के लिए बनाई गई उत्थान समिति को ही इसके विकास में कोई रुचि नहीं है। आसपास के लोग जो यहां घूमने आते हैं वे यहां सफाई अभियान और विकास में मदद करना चाहते हैं, लेकिन समिति उन्हें कोई जवाब नहीं देती। आरोप है कि समिति पर लंबे समय से चंद प्रभावशाली लोगों का ही कब्जा है।
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बता दें कि ऐतिहासिक और पौराणिक तीर्थ द्रोणसागर की हालत बेहद दयनीय हो गई हैै। कमाई के चक्कर में समिति ने सरोवर के पानी को सुखाकर उसमें कमल गट्टा की फसल लगा दी है। इससे श्रद्धालु बेहद नाराज हैं।
तकरीबन तीन दशक पहले पवित्र सरोवर की देखभाल करने के लिए जागरूक लोगों जिनमें घनश्याम पैगिया, स्व.ओमप्रकाश शर्मा आदि थे, तीर्थद्रोणसागर जीर्णोद्धार समिति का गठन कर पंजीकरण कराया था। समिति की सदस्यता आम लोगों के लिए रखी गई थी, लेकिन आगे चलकर समिति पर सिर्फ चंद प्रभावशाली लोगों का ही कब्जा हो गया।
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समिति के पंजीकरण को नियमित नहीं रखा गया। दो तीन साल पहले समिति का नाम बदल कर तीर्थद्रोणसागर उत्थान समिति रख दिया गया। जो लोग पुरानी समिति में थे वही नई समिति में हैं। केवल नाम और पद बदल गए। दो साल पहले विधायक हरभजन सिंह चीमा ने तीर्थद्रोणसागर के विकास के लिए सरोवर को पर्यटन विभाग को सौंपने और मंदिरों का प्रबंधन समिति के पास रखने का सुझाव दिया।
लेकिन समिति ने विधायक को कोई जवाब नहीं दिया। कुछ समय पहले आसपास और यहां सुबह घूमने आने वाले युवाओं ने तीर्थ द्रोणसागर में स्वच्छता अभियान चलाया। युवाओं का आरोप है कि उनके सहयोगी तीर्थस्थल के विकास के लिए सहयोग करना चाहते हैं। लेकिन समिति नहीं मानती है।
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