ऐतिहासिक चैती मेला 29 मार्च से आरंभ हो रहा है, जो 20 अप्रैल तक चलेगा। मेला में नक्काशा बाजार भी लगेगा जो चार अप्रैल तक चलेगा। इसमें कई प्रांतों के घोड़े बिकने आते हैं। मेला की तैयारियों जोरों से चल रही है, दुकानदार रात में भी दुकानें सजाने में लगे हैं।
भगवती बाल सुंदरी की स्वर्ण प्रतिमा साल भर तक पंडा मंदिर पक्का कोट में अज्ञातवास में रहती है। केवल चैत्र माह के नवरात्रों को सार्वजनिक दर्शनों के लिए चैती मंदिर में विराजमान होती है। सहायक प्रधान पंडा मनोज अग्निहोत्री तीन अप्रैल की मध्यरात्रि भगवती की स्वर्ण प्रतिमा को लेकर डोले बैठ कर जुलूस के साथ चैती मंदिर पहुंचेंगे। नौ अप्रैल तक देवी मंदिर में भक्तों को दर्शन देगी।
नौ अप्रैल मध्यरात्रि मुख्य पंडा विकास अग्निहोत्री देवी की प्रतिमा के साथ डोले में बैठ कर जुलूस के साथ देवी को पक्का कोट स्थित पंडा मंदिर लेकर जाएंगे। साल भर तक देवी किसी को दर्शन नहीं देती है। देवी के मंदिर से लौटने के बाद भी मेला 20 अप्रैल तक जारी रहेगा। दुकानदार मेला के लिए रात दिन दुकानें बनाने और सजाने में लगे हैं। खेल तमाशा बाजार में बड़े झूले व अन्य मनोरंजन के स्थानों में मशीनों की फिटिंग चल रही है। मौत का कुंआ बनकर तैयार हो गया है। मेला व्यवस्थापक मेला की व्यवस्थाएं करने में जुटे हैं।
प्रबंधक विकास अग्निहोत्री ने बताया कि मेला में अराजक तत्वों पर नजर रखने के लिए लगभग चार दर्जन सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। मंदिर परिसर के भीतर चार, मुख्य बाजार, चूड़ी बाजार, खेल तमाशा बाजार, सौंदर्य प्रसाधनों के बाजार, नक्काशा बाजार में कैमरे लगाए जा रहे हैं। मंदिर के बाहर बड़ी स्क्रीन लगाई जाएगी। इसमें मेला में परिजनों से बिछड़ने पर लोगों को मिले बच्चों को दिखाने की व्यवस्था होगी। शौचालयों की पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है। मुख्य मेला प्रबंधक वंश गोपाल ने बताया कि मेला में नजर रखने के लिए दो वॉच टॉवर बनाए जा रहे हैं।
एक मोटेश्वर मंदिर के पास तो दूसरा खेल तमाशा बाजार में बन रहा है। मेले में सभी रास्ते बीस फिट से अधिक चौड़े हैं। पेयजल की व्यवस्था की जा चुकी है। मेला को सुचारु रुप से संपन्न कराने के लिए बीते सप्ताह प्रशासन के साथ गणमान्य नागरिकों की बैठक हुई। बैठक में नागरिकों ने मेला में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने का सुझाव दिया है। 28 मार्च से नक्काशा बाजार में घोड़े आने शुरू हो जाएंगे।
दुकानों से होगी आने जाने वालों को परेशानी
प्रशासन की उपेक्षा से मेला क्षेत्र से बाहर दक्षिणी द्वार से चैती चौराहे तक अवैध रुप सड़क किनारे दुकानें लगी हैं। अगर इस मार्ग पर दुकानें लगी तो मेला के दौरान यातायात की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी। इसी मार्ग पर टैंपो, ई-रिक्शा गांवों से आने वाली ट्रैक्टर ट्रालियां और अन्य वाहन खड़े होते हैं। अगर दुकानें लगी तो लोगों के आने जाने में बाधा उत्पन्न होगी। अवैध रुप से दुकानें लगाने से रोकने को न तो पुलिस और न ही प्रशासन को चिंता है।