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श्रद्धालुओं ने कामना में लगाई आस्था की डुबकी

Sun, 26 Mar 2017 11:59 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, ऊध्ामसिंह नगर
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कामना सागर - फोटो : अमर उजाला
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हरिचांद गुरूचांद मतुआ मिशन के संस्थापक हरिचांद ठाकुर के 205 वें जन्मोत्सव पर चल रहे तीन दिवसीय मतुआ मेले के दूसरे दिन देश भर के विभिन्न प्रांतों के अलावा पड़ोसी राष्ट्र नेपाल से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचे। श्रद्धालुओं ने मधुकृष्ण त्रयोदशी महायोग में कामना सागर में स्नान कर अपने आराध्य देव का नमन किया। मंदिर परिसर में आचार्य गोपाल महाराज ने सामूहिक दीक्षा देकर हजारों लोगों को मतुआ संप्रदाय में शामिल कराया। इससे पूर्व सुबह हजारों मतुआ अनुयायियों ने ढोल नगाड़ों के साथ नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली।
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सुबह हजारों मतुआ अनुयायियों ने ढोल नगाड़ों और हरिचांद ठाकुर के चित्र, आचार्य गोपाल महाराज और उनके शिष्य विवेकानंद ब्रह्मचारी को रथ में बैठाकर नगर में विशाल शोभायात्रा निकाली। हरि मंदिर प्रांगण से शुरू हुई शोभायात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होकर वापस मंदिर आकर समाप्त हुई। शोभायात्रा में शामिल लोग ढोल नगाड़ों और शंख ध्वनि के साथ जय-हरिबोल जय-हरिबोल का जाप कर रहे थे। सुबह आचार्य गोपाल महाराज ने श्री ओढ़ाकांदी धाम बांग्लादेश के मुख्य तालाब, सात समुद्र और देश की प्रमुख तेरह नदियों से लाए गए जल को कामना सागर में मिलाकर उसे पवित्र किया। इस दौरान हजारों लोगों ने कामना सागर में फल दान किया। स्नान कार्यक्रम सुबह 10.45 बजे से रात 9.20 तक चला। 

इसमें आसपास के क्षेत्रों के अलावा देश के विभिन्न प्रांतों के साथ नेपाल के महाकाली अंचल के कई कस्बों से भारी तादाद में आए लोगों ने शिरकत की। मंदिर परिसर में देश भर से आए श्रद्धालुओं की टीमों का क्रमबद्ध अखंड हरिनाम कीर्तन और अटूट लंगर जारी रहा। मंदिर परिसर में आचार्य गोपाल ब्रह्मचारी और उनके प्रमुख शिष्य विवेकानंद ब्रह्मचारी ने हजारों महिलाओं और पुरुषों को सामूहिक दीक्षा देकर मतुआ संप्रदाय में शामिल किया। कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री अरविंद पांडेय, चेयरमैन काबल सिंह के अलावा तमाम जनप्रतिनिधियों ने भागेदारी की।
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यातायात हुआ प्रभावित
महावारूणी स्नान महोत्सव में उम्मीद से ज्यादा भीड़ उमड़ी। इसके चलते जाफरपुर मार्ग पर दिन भर यातायात व्यवस्था प्रवाहित रही। भीड़ को देखते हुए जाफरपुर मार्ग के टैंपू यूनियन को अपने अड्डे को अस्पताल के समीप से हटाकर नगर सीमा से बाहर श्मशान घाट के पास ले जाना पड़ा। जाफरपुर की ओर से आने वाले वाहनों को बुक्सौरा, दुर्गापुर मार्ग से डायवर्ट किया गया। 

मतुआ संप्रदाय सनातन धर्म का ही अंग
मतुआ संप्रदाय हिंदु सनातन धर्म का ही एक अंग है। मगर अन्य संप्रदाय की अपेक्षा इस संप्रदाय की पूजा पद्धति बिल्कुल अलग है। इसमें लालझंडा निशान को विशेष महत्व दिया जाता है। ढोल, शंख और कांस ध्वनि के बीच श्रद्धालु लाल निशान हाथ में लेकर नंगे पैर तेज गति से समूह के रूप में मंदिर और अन्य पूजा स्थलों में जाते है। मंदिर में कीर्तन के नाम पर सिर्फ हरिबोल का उच्चारण होता है। 
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