क्षेत्र की 14 लाख आबादी के लिये बना रुद्रपुर शहर में जवाहर लाल नेहरू जिला अस्पताल खुद बीमार है। कम खर्च में इलाज होने की उम्म्मीद लेकर दूरदराज क्षेत्रों से जिला अस्पताल आने वाले मरीजों को अस्पताल में बेहतर इलाज नहीं मिल पा रहा। अस्पताल में डॉक्टर तो मरीजों को देख रहे हैं, लेकिन मुफ्त दवाएं नहीं मिल पा रहीं। यही कारण है मरीजों को मजबूरन बाजार से महंगे दामों पर मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ रही हैं।
जिला अस्पताल में रोजाना औसतन 1500 मरीज आते हैं। इन्हें जांच के लिए डॉक्टर तो अस्पताल में मिल जा रहे हैं लेकिन मर्ज के इलाज के लिए मुफ्त दवाएं नहीं मिल पा रहीं। अस्पताल में जनवरी के बाद दवा नहीं आई है। यही कारण है की मरीजों के तीमारदारों को महंगी दवा खरीदने को मजबूर होना पड़ रहा है।
आलम यह है कि मामूली बुखार एवं सिरदर्द की दवाइयां भी अस्पताल में मरीजों को नहीं मिल पा रही हैं। गोदाम में नाममात्र की ही दवाइयां रखी हैं। अस्पताल में दवाइयां न होने का फायदा सीधे तौर पर डॉक्टरों को भी मिल रहा है। अस्पताल में मरीज को जांचने के बाद डॉक्टर बाहर मिलने वाली दवाई पर्चे पर लिखते ही दुकान का पता भी बता रहे हैं। इससे मरीजों का महंगी दवाइयां खरीदना मजबूरी बना है।
डॉक्टरों का मेडिकल पर तय होता है कमीशन
रुद्रपुर। मरीजों की बीमारी की चिंता न करते हुए डॉक्टरों को अपने कमीशन की चिंता होती है। यही कारण है डॉक्टरों द्वारा दवाई लिखने के बाद मरीज को संबंधित मेडिकल से ही खरीदने की सलाह दी जाती है। इसके साथ ही किसी खास कंपनी की दवा ही खरीदने को भी मरीजों से कहा जाता है, क्योंकि कुछ बड़ी कंपनियां अपनी दवाइयों को अन्य कंपनी की तुलना में महंगे दामों पर बेचती हैं। इस कारण से डॉक्टर संबंधित दवा ही खरीदने का दबाव डालते हैं।
मेडिकल पर भीड़, सूना पड़ा है सरकारी सस्ती दवाओं का जनऔषधि केंद्र
डॉक्टरों की मिलीभगत कहें या लोगों में जागरूकता की कमी रुद्रपुर शहर में केंद्र सरकार की ओर से खोला गया सस्ती दवाओं के लिये जनऔषधि केंद्र सूना है। दिनभर में इक्का दुक्का मरीज ही सरकारी दवा केंद्र पर दवा लेने पहुंचते हैं, जबकि नियमों के मुताबिक सरकारी डॉक्टरों के लिए मरीजों को जनऔषधि केंद्र में भेजना जरूरी है। वहीं रुद्रपुर के गाबा चौक पर स्थित जनऔषधि केंद्र एक साल बाद भी मरीजों के इंतजार में है। कोर्ट के निमयों के मुताबिक डॉक्टरों को मरीज के पर्चे पर बड़े अक्षरों में जेनेरिक दवाइयों के बारे में साफ-साफ लिखना होता है, जबकि जिला अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा मरीजों को भ्रमित किया जा रहा है।
अस्पताल में दवाओं की कमी काफी समय से है। कई बार देहरादून लिखित शिकायत भी की जा चुकी है लेकिन कोई परिणाम नहीं निकला। दवाइयां अस्पताल में न होने पर मरीजों को बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। ऐसे में अस्पताल कुछ नहीं कर सकता। दवाइयां आने पर ही मरीजों को दी जाती हैं।
- डॉ. टीसी पंत, प्रमुख चिकित्सक अधीक्षक।